मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा ने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पक्षपात करते हुए क्लीन चिट दिए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस बारे में फैसला गुण-दोष और तथ्यों के आधार पर लिया गया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के आचार संहिता उल्लंघन मामलों में क्लीन चिट दिए जाने पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के असहमित जताए जाने के विवाद पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा, ‘मैं किसी की भी नैतिकता पर कैसे फैसला दे सकता हूं. लवासा तो वैसे भी वरिष्ठ सहयोगी हैं.’ पीटीआई से बातचीत में सीईसी सुनील अरोड़ा ने कहा, ‘भले ही उनका (अशोक लवासा) कुछ शक-शुबहा रहा हो या भावनाएं रही हों, आखिरकार हममें से कोई भी खुद से झूठ नहीं बोल सकता. लेकिन, चुनाव आयोग के सभी सदस्य हूबहू एक दूसरे जैसे नहीं हो सकते. मौजूदा चुनाव आयोग हो या पहले का, लोग एक दूसरे की ‘फोटो कॉपी’ नहीं हैं.’

चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति को आयोग के फैसलों में दर्ज न किए जाने के आरोप पर अरोड़ा ने कहा, ‘जब हम फैसले को औपचारिक तौर पर बताते हैं, चाहे यह 2-1 से बहुमत का फैसला हो या सर्वसम्मति से, हम उसेे आदेश में नहीं लिखते हैं. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) भी बहु सदस्यीय संस्था है. जब वह (यूपीएससी) किसी उम्मीदवार को पास या फेल करती है, तो वह सिर्फ नतीजे के बारे में सूचना देती है लेकिन इसका उल्लेख कभी नहीं करती कि किस सदस्य ने क्या लिखा है.’ उन्होंने इशारों मेें कहा कि चुनाव आयुक्तों को चुनाव के दौरान किसी विवाद से बचना चाहिए.

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भाषणों से जुड़ी शिकायतों पर उन्हें दी गई सिलसिलेवार क्लीन चिट पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने असहमति जताई थी. वहीं, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात के साथ फैसला करने का आरोप लगाया था. चुनाव आयोग के आदेशेां में अपनी असहमति दर्ज कराने की अशोक लवासा की मांग नहीं माने जाने पर उन्होंने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर लिया था.