भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अफसर हैं- मोहम्मद सनाउल्लाह. असम की राजधानी गुवाहाटी में रहते हैं. उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने सोचा नहीं होगा कि उन्हें यह दिन भी देखना पड़ेगा. लेकिन बीते मंगलवार को उन्हें ‘विदेशी नागरिक’ घोषित कर दिया गया. इसके बाद उन्हें पुलिस की गाड़ी में उस शरणार्थी शिविर में पहुंचा दिया गया, जहां ‘अवैध विदेशी नागरिक’ रखे गए हैं. इससे मायूस सनाउल्लाह ने मीडिया से कहा, ‘भारत की सेना में 30 साल तक सेवाएं देने का मुझे यह इनाम मिला है.’

मोहम्मद सनाउल्लाह सेना में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे. उन्हें बाद में लेफ्टिनेंट का मानद पद भी दिया गया था. लेकिन इस वक़्त सनाउल्लाह यह साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं कि वे भारत के ही नागरिक हैं. असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीज़ंस) को अपडेट करने की प्रक्रिया के दौरान ‘विदेशी नागरिक’ घाेषित किए जाने के बाद अब वे गुवाहाटी उच्च न्यायालय में फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने की तैयारी कर रहे हैं. वे कहते हैं, ‘मैं भारतीय हूं और हमेशा भारतीय ही रहूंगा.’

एनआरसी को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया में इस तरह की ग़लतियों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस प्रक्रिया से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान असम के अधिकारियाें से कहा, ‘मीडिया हमेशा ग़लत नहीं होता. इस तरह की शिकायतों (सनाउल्लाह जैसी) के बाबत आ रही ख़बरें व्यथित करने वाली हैं. एनआरसी से जुड़ी आपत्तियों का क़ायदे से निराकरण किया जाना चाहिए. सिर्फ़ इसलिए कि एनआरसी का अंतिम मसौदा प्रकाशित करने की तारीख़ (31 जुलाई) नज़दीक आ रही है, प्रक्रिया को छोटा नहीं किया जाना चाहिए. आप लोग (अधिकारी) क़ायदे से काम कीजिए.’