पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति को एक अगस्त तक सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी एजेंसियां ग़िरफ़्तार नहीं कर सकेंगी. दिल्ली की एक अदालत ने चिदंबरम पिता-पुत्र को यह राहत दी है.

एयरसेल-मैक्सिस कंपनियों के बीच हुए सौदे में अनियमितताओं के कथित आरोपों की सीबीआई और ईडी दोनों जांच कर रही हैं. सीबीआई इसमें भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही है. जबकि ईडी काले धन को वैध करने से संबंधित आरोपों की. पी चिदंबरम पर आरोप है कि केंद्र में वित्त मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया. एयरसेल-मैक्सिस के बीच सौदे में विदेश निवेश को एफआईपीबी (विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड) से मंज़ूरी दिलाई. जबकि कार्ति पर इस सौदे में वित्तीय लाभ लेने का आरोप है.

अदालत को ईडी ने बताया कि उसके वरिष्ठ अधिकारी इन दिनों इसी मामले की जांच के सिलसिले में सिंगापुर गए हुए हैं. उनके लौटने के बाद यह बेहतर पता चल सकेगा कि जांच किस स्तर तक पहुंची है और इसमें चिदंबरम पिता-पुत्र के लिए अग्रिम ज़मानत मंज़ूर की जा सकती है या नहीं. एजेंसी ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अदालत ने तीन सप्ताह का समय मांगा. ज़वाब में चिदंबरम के वकील ने अपने मुवक्किल के लिए ग़िरफ़्तारी से राहत मांग ली. जिसे अदालत ने मंज़ूर कर लिया.