इंग्लैंड में क्रिकेट विश्व कप 2019 शुरू हो चुका है. अपने 44 साल के इतिहास में इस आयोजन ने कई रोमांचक मुकाबले देखे हैं. लेकिन, इनमें से कुछ मुकाबले ऐसे भी हैं जो रोमांचक तो थे, फिर भी इन्हें इनसे जुड़े दूसरे घटनाक्रमों के चलते ज्यादा याद किया जाता है.

1983 विश्व कप : कपिल देव का शतक और बीबीसी की हड़ताल

1983 के क्रिकेट विश्व कप में जिम्बाब्वे ने बड़ा उलटफेर कर सभी को हैरान कर दिया था. डंकन फ्लेचर के हरफनमौला प्रदर्शन के बूते उसने ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को शिकस्त दे दी थी. इसके बाद उसका मुकाबला भारत से हुआ और इस मैच में वह एक और उलटफेर करने की ओर बढ़ रही थी. उसने भारतीय टीम के 17 रन पर पांच विकेट उखाड़ दिए थे.

लेकिन, इसके बाद भारतीय कप्तान कपिल देव ने 138 गेंद में 175 रन की शानदार पारी खेली. कपिल की शतकीय पारी से भारत ने 266 रन का स्कोर बनाया जो जिम्बाब्वे के लिये काफी ज्यादा साबित हुआ. कपिल का शतक उनकी शानदार नेतृत्व क्षमता का उदाहरण था और इसकी बदौलत भारत एक हफ्ते बाद ही इस विश्व कप में चैम्पियन बना.

लेकिन, कपिल देव की इस पारी का क्रिकेट के चाहने वाले लुत्फ़ नहीं उठा सके थे, जो उस समय एक बड़ा चर्चा का विषय बना था. कपिल देव की इस पारी का लुत्फ केवल इंग्लैंड के टनब्रिज वेल्स मैदान में मौजूद दर्शक ही उठा सके क्योंकि बीबीसी के टेक्नीशियन हड़ताल पर थे. इसके चलते इस मैच का टीवी पर प्रसारण नहीं हो पाया था.

1999 विश्व कप : आस्ट्रेलिया टाई मैच में जीता

1999 के विश्व कप का यह शायद सबसे रोमांचक मैच था. एजबेस्टन में हुए इस सेमीफाइनल में आस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 213 रन बनाये. ऑस्ट्रेलिया को कम स्कोर पर समेटने में दक्षिण अफ्रीका के शॉन पोलाक की अहम भूमिका रही. उन्होंने 36 रन देकर पांच विकेट चटकाये थे.

इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम ने 61 रन पर चार विकेट खो दिए. इसके बाद जोंटी रोड्स और जैक कैलिस ने दक्षिण अफ्रीका को संभाला और 145 रनों तक पारी को लेकर गए. मैच के अंतिम ओवर में दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए केवल नौ रन की दरकार थी और उसके नौ विकेट गिरने के बाद पिच पर एलेन डोनाल्ड और हरफनमौला लांस क्लूजनर थे. क्लूजनर ने शुरूआती तीन गेंदों पर छह रन बना लिए जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका को आखिरी तीन गेंदों पर एक रन की दरकार थी.

लेकिन लांस क्लूजनर ने गेंद को मिड-आफ की ओर भेजा और एक रन के लिये भाग लिये. नान-स्ट्राइकर छोर पर खड़े एलेन डोनाल्ड ने उनकी आवाज नहीं सुनी और इस दौरान उनका बल्ला भी गिर गया. इतने में ऑस्ट्रेलियाई मार्क वॉ ने गेंद लेकर इसे गेंदबाज डेमियन फ्लेमिंग की ओर फेंक दिया. फ्लेमिंग ने इसे तुंरत ही विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट की ओर फेंक दिया जिन्होंने डोनाल्ड को रन आउट कर दिया. हालांकि, यह मैच टाई रहा, लेकिन आस्ट्रेलिया बेहतर नेट रन रेट की बदौलत फाइनल में पहुंच गया.

2011 विश्व कप : केविन ओब्रायन का धमाका

भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए विश्व कप का यह लीग मैच था. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौसिखिया मानी जाने वाली टीम आयरलैंड के खिलाफ बल्ले से काफी अच्छा प्रदर्शन किया और सात विकेट पर 327 रन बनाये. इस मैच में इंग्लैंड की जीत पक्की मानी जा रही थी क्योंकि एक तो उसके सामने आयरलैंड जैसी कमजोर टीम थी, दूसरा विश्व कप में पहले कभी भी किसी टीम ने इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं किया था.

लेकिन, इसके बाद बेंगलुरु के मैदान में जो हुआ उसने इस साधारण से दिखने वाले मैच को मैच को यादगार बना दिया. आयरलैंड के खब्बू बल्लेबाज केविन ओब्रायन ने विश्व कप इतिहास में सबसे तेज शतक जड़ते हुए आयरलैंड को तीन विकेट से शानदार जीत दिला दी, उन्होंने ऐसा महज 50 गेंदों में किया था. इस मैच में उन्होंने 13 चौकों और छह गगनचुंबी छक्कों की मदद से 63 गेंदों में कुल 113 रन बनाए थे. इस मैच में आयरलैंड की जीत का श्रेय केवल केविन ओब्रायन को ही जाता है क्योंकि उनके बल्लेबाजी के लिए आने से पहले आयरलैंड की आधी टीम महज 111 रनों पर पैवेलियन लौट चुकी थी.

2015 विश्व कप : एक अफ्रीकी ने ही दक्षिण अफ्रीका का दिल तोड़ा

साल 2015 का विश्व कप न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर हुआ था. दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच हुआ यह मैच इस विश्व कप का पहला सेमीफाइनल मुकाबला था. दिग्गजों से सजी दक्षिण अफ्रीकी टीम को इस मैच का प्रबल दावेदार माना जा रहा था. लेकिन यह मैच न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में होने के कारण न्यूजीलैंड की दावेदारी को भी खारिज नहीं किया जा रहा था. पहले बल्लेबाजी करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने फॉफ डु प्लेसिस (82 रन) और एबी डिविलियर्स (65 रन) की मदद से 43 ओवर में पांच विकेट पर 281 रन बना लिए थे. लेकिन, इसके बाद बारिश के कारण मैच को 43-43 ओवर का कर दिया गया और डकवर्थ-लुईस नियम के तहत न्यूजीलैंड को 43 ओवर में 298 रनों का लक्ष्य दिया गया.

इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत काफी अच्छी रही. धाकड़ बल्लेबाज ब्रैंडम मैकुलम की 26 गेंदों पर 59 रनों की पारी ने छह ओवर में ही न्यूजीलैंड का स्कोर 71 रन पहुंचा दिया. लेकिन फिर दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजों ने मैच में वापसी की और 150 रनों तक न्यूजीलैंड के चार विकेट गिरा दिया.

एक समय न्यूजीलैंड के पांच प्रमुख बल्लेबाज पैवेलियन लौट चुके थे और उसे पांच ओवर में 47 रनों की दरकार थी. न्यूजीलैंड की जीत अब केवल हरफनमौला खिलाड़ी ग्रांट इलियट पर निर्भर थी क्योंकि उनके अलावा केवल गेंदबाज ही बल्लेबाजी के लिए बचे थे. इसके बाद इलियट ने अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन पारी खेली और नाबाद 84 रन बनाकर न्यूजीलैंड को विश्व कप के फाइनल में पहुंचा दिया. न्यूजीलैंड के लिए इस जीत के अलग ही मायने थे क्योंकि इससे पहले उसे विश्व कप के छह सेमीफाइनल में हार मिल चुकी थी.

उस समय यह मैच एक और वजह से भी खासा चर्चा में रहा था और यह वजह भी ग्रांट इलियट से ही जुड़ी थी. दरअसल, इलियट मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के ही हैं. जोहानसबर्ग में जन्मे इलियट ने वहीं पढ़ाई-लिखाई की और वहीं क्रिकेट के गुर भी सीखे. वहां वे प्रथम श्रेणी क्रिकेट भी खेले. लेकिन, दक्षिण अफ़्रीका की राष्ट्रीय टीम में जल्द मौका न मिलने की आशंका के चलते 2001 में वे न्यूजीलैंड चले गए और वहां की राष्ट्रीय टीम से जुड़ गए.

यही वजह थी कि 2015 विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड की जीत के अगले दिन दुनियाभर के कई अखबारों में छपा ‘एक दक्षिण अफ्रीकी ने ही दक्षिण अफ्रीका का दिल तोड़ा.’