‘ये उस किताब की नहीं चलने देते जिसकी ये शपथ लेते हैं.’ यह अनुभव सिन्हा निर्देशित फिल्म ‘आर्टिकल-15’ का एक संवाद है. यह दिलचस्प है कि इस फिल्म का ट्रेलर, नरेंद्र मोदी के दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ घंटे पहले ही जारी किया गया है. इस मौके पर एक आशावादी भारतीय की तरह हम उम्मीद करना चाहेंगे कि अपने प्रधानमंत्री और उनकी अगुवाई वाली सरकार के संदर्भ में हमें यह संवाद दोहराने की जरूरत कभी न पड़े.

लेकिन फिर भी मोदी जी को किनारे कर, अगर बीते पांच सालों के हिसाब-किताब पर गौर करें तो यह शिद्दत से महसूस होता है कि हमें ‘आर्टिकल-15’ जैसी आर्टिकल- 14, 19, 21, 30 और 44 सरीखी फिल्मों की भी जरूरत है. इन अनुच्छेदों में क्या है, यह आप फुर्सत से खोजकर पढ़िएगा. फिलहाल, आर्टिकल-15 की बात कर लेते हैं जो हर भारतीय नागरिक को समानता का अधिकार देता है. कहने का मतलब यह कि अनुच्छेद-15 राज्य यानी सरकारों को धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ असमानता का व्यवहार करने से रोकता है. इसी की बात अनुभव सिन्हा की यह फिल्म करने जा रही है.

आर्टिकल-15 के ट्रेलर पर आएं तो यहां आयुष्मान खुराना एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका में दिखाई देते हैं जो कथित नीची जाति की तीन लड़कियों की मौत की गुत्थी सुलझाने निकला है. कुछ बेहद प्रभावी दृश्य और संवाद भली तरह से आपको कथानक का अंदाजा देते हैं जिसमें भारतीय समाज के भीतर की जातिगत सड़ांध का भभका आपको महसूस होता है. ये झलकियां लोगों के अवचेतन में जमे जातिवाद, ऊंची जाति के लोगों की दबंगई और पुलिस के काम करने के तरीके पर छोटी-छोटी मगर करारी टिप्पणियां करती दिखती है.

अभिनय की बात करें तो मुख्य भूमिकाओं में आयुष्मान खुराना के अलावा ज़ीशान अय्यूब, कुमुद मिश्रा, मनोज पाहवा और सयानी गुप्ता नज़र आ रहे हैं. मूंछों वाले आयुष्मान खुराना अपने लुक और मिज़ाज से इस बात की तस्दीक करते हैं कि वे हमेशा की तरह इस बार भी पैसा वसूल रहने वाले हैं. ज़ीशान अय्यूब की दानेदार संवाद अदायगी और कुमुद मिश्रा का भोलेपन वाला अभिनय इन झलकियों में भी आपका ध्यान पूरी तरह खींचने में सफल होता है. यहां पर सबसे ज्यादा आश्चर्य सयानी गुप्ता को देखकर होता है. चेहरे पर ढेर सारा नमक रखने वाली यह बेहद सेक्सी अभिनेत्री एक दलित या आदिवासी समुदाय (जिनकी परंपरागत छवि सयानी गुप्ता के निभाए किरदारों से मेल नहीं खाती) की लड़की बनी है. यहां पर अभिनय तो उनका भला लगता है लेकिन बोलने का अंदाज जरा खटकता है. उम्मीद की जानी चाहिए कि फिल्म में समग्रता से देखने पर वे प्रभावित करने में सफल होंगी.

बीते साल, ‘मुल्क’ जैसी बेहद सार्थक और अलहदा फिल्म देने वाले अनुभव सिन्हा ने ‘आर्टिकल-15’ का लेखन और निर्देशन किया है. उनके साथ इस पटकथा का सहलेखन गौरव सोलंकी ने किया है. पूर्व पत्रकार और गीतकार सोलंकी इसके पहले ‘दास देव’ और ‘वीरे दी वेडिंग’ के गीत लिखने के लिए, और उससे पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार लौटाने के लिए चर्चा में आए थे. बहरहाल, ‘आर्टिकल-15’ की झलकियां न सिर्फ मनोरंजन की बल्कि इस बात की भी उम्मीद जगाती हैं कि इसे देखकर बहुत से लोगों को संविधान नाम की शय भी याद आएगी. बाकी क्या होगा, इसका पता 28 जून को फिल्म रिलीज के साथ ही चल सकेगा.

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