केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (सीएसओ) ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जारी किए हैं. लेकिन ये आंकड़ों सरकार के लिए अच्छी खबर नहीं लाए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत रही. यह 1972-73 के वि​त्त वर्ष के बाद बीते 45 सालों में सबसे ज्यादा है. वहीं वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर भी 5.8 फीसदी के साथ पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर पर दर्ज की गई है. इससे पहले जीडीपी की सबसे धीमी वृद्धि दर 2013-14 के वित्तीय वर्ष में देखने को मिली थी.

खबरों के मुताबिक जीडीपी वृद्धि दर में हुई इस गिरावट से भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के मामले में भी पिछड़ गया है क्योंकि इस समयावधि में चीन की विकास दर 6.4 फीसदी दर्ज की गई है. वहीं बीते वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही की तुलना 2017-18 के वित्त वर्ष से करें तो उस दौरान भारत की जीडीपी 7.2 फीसदी रही थी. सीएसओ के आंकड़ों में वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा 3.39 प्रतिशत बताया गया है जो कि बजट के 3.40 फीसदी के संशोधित अनुमान से कम है.