इंग्लैंड में जारी क्रिकेट विश्वकप में अभी भारतीय टीम के मैच शुरू भी नहीं हुए हैं. भारत का पहला मैच पांच जून को दक्षिण अफ्रीका से है. लेकिन उससे पहले ही विवाद की ख़बरें आने लगी हैं. बताया जाता है कि आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) भारतीय क्रिकेट दल से इस बात पर नाख़ुश है कि वह मीडिया प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहा है. ख़बरों की मानें तो इस बाबत आईसीसी ने बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) को पत्र लिखकर अपनी नाख़ुशी जताई है.

ख़बरों के मुताबिक आईसीसी ने बीसीसीआई को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से ताक़ीद की है कि भारतीय क्रिकेट दल टूर्नामेंट में निर्धारित मीडिया प्रोटोकॉल का पालन करे. बताया जाता है कि यह पत्र पिछले घटनाक्रमों को देखने के बाद भेजा गया है. भारत ने टूर्नामेंट शुरू होने से पहले न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश के साथ अभ्यास मैच खेले थे. मैचों के बाद तय व्यवस्था के अनुसार दोनों टीमों के सभी ख़िलाड़ियों को बातचीत करने के लिए मीडिया के सामने (मीडिया मिक्स ज़ोन) आना होता है. लेकिन भारतीय टीम का कोई खिलाड़ी पहले अभ्यास मैच के बाद मीडिया के सामने नहीं आया. भारत यह मैच न्यूज़ीलैंड से हार गया था.

बताया जाता है कि मीडिया मिक्स ज़ाेन की व्यवस्था पर सभी देशों के क्रिकेट बोर्डों ने अपनी सहमति दी हुई है. यह व्यवस्था 2017 के चैंपियंस ट्रॉफी टूर्नामेंट से शुरू हुई थी. इसके बाद से हर बड़े टूर्नामेंट में इसका पालन किया जाता है. कहा जा रहा है कि आईसीसी इतने पर भी तैयार है कि टीमें सभी खिलाड़ियाें को न सही तो चार-पांच खिलाड़ी ही मैच के बाद मीडिया से बातचीत के लिए भेज दें. लेकिन भारतीय क्रिकेट दल द्वारा इसकी भी उपेक्षा किए जाने के बाद आईसीसी को आशंका है कि दूसरी टीमें भी ऐसा कर सकती हैं. इससे व्यवस्था भंग हो सकती है. इसीलिए बीसीसीआई को पत्र लिखकर ताक़ीद की गई है.