बिहार में मंत्रिपरिषद विस्तार से भाजपा को अलग रखे जाने की खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के कोटे से आठ मंत्रियों को इसमें शामिल किया. इस बारे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जदयू की रिक्तियों की वजह से मंत्रिमरिषद का विस्तार हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि सरकार में जदयू के कोटे से मंत्रियों की संख्या पहले से पांच कम थी. वहीं, लोकसभा चुनाव में तीन मंत्रियों के सांसद चुने जाने के बाद यह संख्या बढ़कर आठ हो गई. उधर, नीतीश कुमार के इस कदम को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जदयू को जगह न मिलने की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, भाजपा और जदयू दोनों ने ही इस बात से इन्कार किया है.

हर वर्ग की रगों में राष्ट्रवाद दौड़ाएं : मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद को एक अभियान के तौर पर आगे बढ़ाने की बात कही है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक उन्होंने उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक कार्यक्रम में कहा, ‘हर वर्ग की रगों में राष्ट्रवाद दौड़ाएं. देश को सर्वोपरि रखकर काम करने से सबकुछ आसान होता चला जाएगा.’ संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों को जीवनभर राष्ट्रवादी सोच लेकर चलने का सुझाव दिया. बताया जाता है कि सोमवार को वे पूर्वी उत्तर प्रदेश के संघ प्रशिक्षण वर्ग में कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे. इनमें अयोध्या में राम मंदिर निर्माण प्रमुख है.

पश्चिम और दक्षिण भारत के जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 20 फीसदी पानी उपलब्ध

केंद्रीय जल आयोग ने देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से में गंभीर जल संकट की ओर इशारा किया है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इन क्षेत्रों के 91 बड़े जलाशयों में उनकी क्षमता का महज 20 फीसदी हिस्सा पानी बचा हुआ है. आयोग का कहना है कि यह आंकड़ा बीते दस वर्षों के औसत से भी कम है. गुजरात और महाराष्ट्र के 27 बड़े जलाशयों में केवल 11 फीसदी पानी बचा हुआ है. पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा 15 फीसदी और बीते 10 वर्षों के दौरान औसतन 19 फीसदी था. यानी बीते एक दशक के दौरान जलाशयों में पानी की स्थिति को लेकर पश्चिम और दक्षिण भारत में इस साल सबसे खराब हालात हैं.

उत्तराखंड : आग की 1466 घटनाओं के चलते 2,138 हेक्टेयर जंगल झुलसा

उत्तराखंड में आग की 1466 घटनाओं में 2,138 हेक्टेयर जंगल झुलस चुका है. इससे सबसे अधिक टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली और बागेश्वर ज़िले प्रभावित हैं. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक सूबे के जंगलों में फैली आग को बुझाने के लिए करीब 6,000 मजदूर तैनात किए गए हैं. राज्य में इस मामले को देख रहे नोडल अधिकारी प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि शनिवार देर रात तक 50 से अधिक जगहों पर आग लगने की जानकारी थी. वहीं, वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा ने कहा है कि आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया जाएगा. दूसरी ओर, चमोली में बादल फटने की वजह से भारी नुकसान की खबर है. इसके चलते लामबगड़ इलाके में करीब आठ हेक्टेयर जमीन को नुकसान पहुंचा है. अल्मोड़ा में भी बादल फटने से कई घर बह गए हैं.

दवा कंपनियां कारों की तुलना में 13 फीसदी अधिक कार्बनडाइऑक्साइड छोड़ती हैं : शोध रिपोर्ट

दुनियाभर की दवा कंपनियां कारों की तुलना में 13 फीसदी अधिक कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन का कारण बनती हैं. हिन्दुस्तान ने एक शोध रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इस मामले में विश्व की शीर्ष 15 दवा कंपनियों की स्थिति बहुत खराब है. इस शोध में शामिल कनाडा स्थित पर्यावरण इंजीनियर प्रोफेसल लुत्फी बेल्खीर का कहना है कि यह स्थिति तब है जब कारों के मुकाबले दवाओं का बाजार 28 फीसदी छोटा है. इस रिपोर्ट में भारत के खराब हालात का भी जिक्र किया गया है. इसमें साल 2014 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि तेलंगाना के पेट्टाचुरु स्थित कंपनियों में प्रतिदिन 44 किलोग्राम एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लॉक्सेसिन पानी में बहा दी जाती है.

सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला प्रक्रिया और साक्षात्कार पैनल में चर्च प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला प्रक्रिया और साक्षात्कार पैनल में चर्च प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है. दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक कॉलेज की गवर्निग बॉडी के तीन शिक्षक सदस्यों और याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में याचिका दायर की है. इसमे कहा गया है कि कॉलेज में 15 जून से दाखिले शुरू होने हैं और ऐसे में इस फैसले पर रोक लगाई जाए. इससे पहले बीते मार्च में सेंट स्टीफंस कॉलेज की गवर्निग बॉडी ने फैसला लिया गया था कि छात्रों के साक्षात्कार पैनल में सुप्रीम काउंसिल को शामिल किया जाएगा. इस पर शिक्षकों का कहना था कि सुप्रीम काउंसिल के सदस्य उत्तर भारत के चर्च के प्रतिनिधि होते हैं और इस स्थिति में कॉलेज की अकादमिक गतिविधियों में चर्च के सदस्यों का दखल बढ़ेगा. उन्होंने इसे कॉलेज के संविधान का उल्लंघन बताया था. वहीं, कॉलेज प्रशासन का दावा है कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान होने के चलते वह इस तरह के फैसले लेने के लिए आजाद है. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 12 जून की तारीख तय की है.