केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी पढ़ाने का प्रस्ताव देने को लेकर मचे बवाल के बीच देश के नए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अहम बयान दिया है. तमिलनाडु में इस प्रस्ताव को लेकर बढ़ रहे आक्रोश को देखते हुए उन्होंने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिए जाने से पहले राज्य सरकारों से परामर्श लिया जाएगा. एस जयशंकर ने आश्वासन दिया कि किसी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी.

पीटीआई के मुताबिक विदेश मंत्री जयशंकर की यह प्रतिक्रिया इस मुद्दे पर एक टि्वटर यूजर के सवाल के जवाब में आई है. इसमें उन्होंने कहा, ‘एचआरडी मंत्री को सौंपी गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति महज एक मसौदा रिपोर्ट है. आम जनता से प्रतिक्रिया ली जाएगी. राज्य सरकारों से परामर्श किया जाएगा. इसके बाद ही इस मसौदा रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा. भारत सरकार सभी भाषाओं का सम्मान करती है. कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी.’

गौरतलब है कि इस मामले में नए एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी आश्वासन दिया है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी. उन्होंने कहा, ‘एनईपी को लेकर मुझे डॉक्टर कस्तूरीरंजन समिति की रिपोर्ट का ड्राफ्ट मिला है. इस नीति को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है.’