उत्तर प्रदेश में बीते लोकसभा चुनाव से पहले बने समाजवादी पार्टी (सपा)-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन के टूटने के आसार नजर आने लगे हैं. एनडीटीवी के मुताबिक अपनी पार्टी के नेताओं साथ हुई एक बैठक में बसपा प्रमुख मायावती ने ‘गठबंधन’ को ‘बेकार’ कहा है. इसके साथ ही उसी बैठक में उन्होंने यह भी कहा, ‘लोकसभा के बीते चुनाव में यादव जाति के वोट बसपा को नहीं मिले. यहां तक कि खुद यादव परिवार भी यादवों के वोट हासिल कर पाने में नाकामयाब रहा.’

मायावती का यह भी मानना है कि उत्तर प्रदेश में यादवों के वोट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसी) और कांग्रेस के खाते में गए हैं. इसके अलावा बसपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर होने वाले उपचुनाव अकेले ही लड़ने की बात भी कही है. वहीं इस बीच अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में अकेले ही एक रैली संबोधित की है. इन सबके मद्देनजर सपा-बसपा के गठबंधन के टूटने के कयास लगने लगे हैं.

सपा-बसपा ने बीते लोकसभा चुनाव को देखते हुए इसी साल गठबंधन का ऐलान किया था. बाद में अजीत सिंह के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) भी इसका हिस्सा बना था. इस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में 78 पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन चुनावी नतीजों में इस गठबंधन को उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली. लोकसभा चुनाव में सपा के खाते में जहां सिर्फ पांच सीटें आई तो वहीं बसपा को महज दस संसदीय सीटें जीत पाने में ही कामयाबी मिली है.