निर्देशक : सुधीर मिश्रा

लेखक (हिंदी एडप्टेशन) : निसर्ग मेहता, शिवा बाजपेयी, मयूख घोष

कलाकार : रोनित रॉय, टिस्का चोपड़ा, परवीन डबास, दलीप ताहिल, मोहन कपूर

रेटिंग : 2/5

हिंदुस्तान के वेब सीरीज स्पेस पर बॉलीवुड के पाषाणकालीन तौर-तरीकों का आक्रमण हो चुका है. कहां तो इस स्पेस को मौलिक कंटेंट रचने के लिए ही उपयोग होना था और कहां ये उसी रीमेक कल्चर को अपनाने लगा है जिसने बॉलीवुड को महा-आलसी बनाया और नई कहानियां खोजने और उन्हें कहने की मेहनत करने से दूर कर दिया.

‘क्रिमिनल जस्टिस’ के बाद हॉटस्टार स्पेशल्स की नयी पेशकश ‘हॉस्टेजेस’ इसी नाम के इजराइली शो के 2013 में आए पहले सीजन का आधिकारिक रीमेक है. पंकज त्रिपाठी और विक्रांत मैसी अभिनीत ‘क्रिमिनल जस्टिस’ब्रिटिश शो ‘क्रिमिनल जस्टिस’ (और अमेरिकी ‘द नाइट ऑफ’) का आधिकारिक एडप्टेशन था. हॉटस्टार की आने वाली एक वेब सीरीज इसी तरह चर्चित ब्रिटिश (और अमेरिकी) सिटकॉम ‘द ऑफिस’ का आधिकारिक हिंदी रीमेक/एडप्टेशन होने जा रही है. हॉटस्टार इन सभी वेब सीरीज को ‘स्पेशल्स’ का नाम दे रहा है!

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मतलब साफ है. जिस तरह मुट्ठीभर बिरले फिल्मकार बॉलीवुड में मौलिक सिनेमा बनाने की कोशिश करते रहे हैं और बाकी सभी फिल्मकार पुराने माल को ही रिसाइकल करने में दिलचस्पी लेते रहे हैं, वैसा ही चलन हिंदुस्तानी वेब स्पेस का भी भविष्य है. ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘मेड इन हैवन’, ‘मिर्जापुर’, ‘दिल्ली क्राइम’, ‘लाखों में एक’ जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मौलिक देसी वेब शोज के साथ-साथ हमें औसत गुणवत्ता वाले ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ और ‘स्मोक’ जैसे शोज तो मिलेंगे ही, मगर उनके अलावा भी हमें भविष्य में ‘क्रिमिनल जस्टिस’ और ‘हॉस्टेजेस’ जैसे गैरजरूरी रूपांतरणों (एडप्टेशन) से भी दो-चार होना पड़ेगा.

फीचर फिल्मों के इतर ऐसा होना वृहद संभावनाएं रखने वाले वेब सीरीज स्पेस में ज्यादा दुखदायी है. क्योंकि एक तो ज्यादातर मशहूर विदेशी शोज आज का हिंदुस्तानी दर्शक किसी न किसी माध्यम पर पहले ही देख लेता है. दूसरा ये कि जो हिंदी रीमेक या एडप्टेशन हमारे यहां अभी बनाए जा रहे हैं, वे पहले से ही अपने मौलिक रूप में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सर्विसिज पर मौजूद हैं. हॉटस्टार की सीरीज ‘क्रिमिनल जस्टिस’ ने जिस ‘द नाइट ऑफ’ की कहानी हिंदी में दिखाई थी वह तो खुद अपने मौलिक स्वरूप में हॉटस्टार पर ही मौजूद है. और सुधीर मिश्रा निर्देशित ‘हॉस्टेजेस’ की ओरिजनल इजराइली सीरीज के दोनों सीजन आप नेटफ्लिक्स इंडिया पर देख सकते हैं. ऐसे में कोई सुधी दर्शक आखिर क्यों ‘मौलिक शुद्धता और सुंदरता’ छोड़कर उसका हिंदी अनुवाद देखना पसंद करेगा?

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दुनिया-भर में दर्शक दो वजहों से आधिकारिक रीमेक या अनुवाद-रूपांतरण देखना पसंद करते हैं (माफ कीजिएगा, ‘हॉस्टेजेस’ की समीक्षा पर आने में थोड़ा वक्त लग रहा है!). जब ये रीमेक-रूपांतरण मौलिक सिनेमा की बराबरी के होते हैं या उससे भी बेहतर बनाए जाते हैं. या फिर, स्थानीय दर्शकों को अपने देसी कलाकारों के साथ अपनी भाषा में ही वह कहानी देखना सुहाता है.

पहली वजह समझने के लिए हमें अमेरिका का रूख करना चाहिए. अमेरिका में दूसरे देशों के चर्चित सिनेमा को रीमेक करने का कल्चर हिंदुस्तान बराबर ही है. लेकिन वेब सीरीज स्पेस में वे जिस विदेशी सीरीज को रीमेक या एडॉप्ट करते हैं उसमें (ज्यादातर वक्त) खुद की इतनी सारी मौलिकता मिला देते हैं कि विश्वभर में फिर उन्हीं के शो का बोलबाला हो जाता है. मौलिक शो से कई गुना ज्यादा मशहूरियत अमेरिकी रीमेक और एडप्टेशन को मिलने लगती है. ‘द ऑफिस’, ‘द नाइट ऑफ’, ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ जैसे कई अमेरिकन रीमेक-एडप्टेशन ऐसे हैं जो मौलिक ब्रिटिश शोज से ज्यादा मकबूल और मशहूर हुए हैं.

बदकिस्मती से हिंदुस्तान में ऐसा न फीचर फिल्मों को लेकर हो पाता है न वेब सीरीज को लेकर होता हुआ दिखाई दे रहा है. न सिर्फ हॉटस्टार का ‘क्रिमिनल जस्टिस’ अपने अमेरिकी बड़े भईया के सामने सर झुकाए खड़ा छोटा भाई नजर आता है, बल्कि हिंदुस्तानी ‘हॉस्टेजेस’ तो ‘क्रिमिनल जस्टिस’ से भी ज्यादा निराश करता हुआ मालूम होता है.

हॉलीवुड, इजराइली टीवी सीरीज भी खूब रीमेक करता रहा है. निकट के समय में कई इजराइली सीरीज विश्वभर में काफी पसंद की जा चुकी हैं जिनमें से कुछ आप मौलिक स्वरूप में हिंदुस्तानी नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम पर भी देख सकते हैं. जैसे ‘द बैकर एंड द ब्यूटी’, ‘वेन हीरोज फ्लाई’, ‘मोसाद 101’, ‘फौदा’.

‘हॉस्टेजेस’ भी अमेरिका में इसी नाम से रीमेक हो चुका है (हालांकि पहले सीजन के खराब प्रदर्शन के बाद दूसरा सीजन वहां कभी नहीं बना) और ‘इन थैरेपी’ (BeTipul) नामक एक सीरीज ‘इन ट्रीटमेंट’ नाम से बनकर खासी प्रशंसा हासिल कर चुकी है. दुनियाभर में मशहूर रही और अपनी आठवें और अंतिम सीजन की तैयारियों में लगी अमेरिकी सीरीज ‘होमलैंड’ भी इजराइली सीरीज ‘प्रिजनर्स ऑफ वॉर’ (Hatufim) पर आधारित थी. हमारे यहां इस इजराइली सीरीज को आधार बनाकर स्टार टीवी पर एक दर्शनीय सीरीज ‘पीओडब्यू : बंदी युद्ध के’ बनाई गई थी.

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समझने वाली बात है कि ऐसी कई इजराइली सीरीज जो अमेरिका में रीमेक-एडॉप्ट होकर सफल हुई हैं, वे मूल कहानियों को आधार बनाकर सीरीज को नयी दिशाओं में ले जाती हैं. केवल पटकथा का पन्ने दर पन्ना अनुवाद भर नहीं करतीं. ‘होमलैंड’ इसका सबसे ज़हीन उदाहरण है, जिसने युद्ध बंदियों के वापस देश लौटने के केंद्रीय विचार को कई नयी दिशाओं में ले जाकर आठ सीजन लंबी दर्शनीय सीरीज का फैलाव दिया है.

यही सुधीर मिश्रा निर्देशित ‘हॉस्टेजेस’ की सबसे बड़ी कमी है - और यही अकेली कमी इसे साधारण वेब सीरीज बनाने के लिए काफी है - कि ये मौलिक इजराइली सीरीज की पटकथा और संवादों का पन्ना-दर-पन्ना हिंदी अनुवाद भर है. यहां कुत्ते का नाम तक बदलने की जहमत नहीं उठाई गई है! न इसमें आपको ‘धारावी’, ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ और ‘खोया खोया चांद’ वाले वेटरन और विलक्षण निर्देशक सुधीर मिश्रा कहीं नजर आते हैं, और न ही सीरीज खुद को अपने सोर्स मटेरियल से मुख्तलिफ और बेहतर बनाने के प्रयास करती हुई नजर आती है. कम से कम पंकज त्रिपाठी और विक्रांत मैसी अभिनीत ‘क्रिमिनल जस्टिस’ में थोड़ी बहुत हिंदुस्तानी मौलिकतातो नजर आई थी.

हॉटस्टार की ‘हॉस्टेजेस’ के लिए तीन देसी लेखकों को क्रेडिट दिया गया है लेकिन समझना मुश्किल है कि संवादों का हिंदी अनुवाद करने के अलावा तीन लेखकीय प्रतिभाओं ने आखिर क्या नया सीरीज में जोड़ा है. चूंकि संवाद नए सिरे से लिखे नहीं गए तो कई जगहों पर अटपटे भी लगते हैं और ऐसी जगहों पर ऐसा नहीं लगता कि कोई भारतीय उन्हें बोल रहा है.

कुछ जो बदलाव किए गए हैं उनमें से न्यूडिटी को कम से कम कर दिया गया है और गलती से गर्भवती हुई 17 साल की एक लड़की को यहां संबंध बनाने की आधिकारिक उम्र (18) का दिखाया गया है. मौलिक सीरीज में एक महिला डॉक्टर और उसके परिवार को कुछ किडनैपर्स उनके घर में हॉस्टेज बना लेते हैं ताकि ये डॉक्टर उनके लिए इजराइल के प्रधानमंत्री को मौत के घाट उतार सके. हॉटस्टार की देसी सीरीज में प्रधानमंत्री की जगह मुख्यमंत्री ने ले ली है और ऐसा करना मामले की ग्रेविटी को तो कम करता ही है, यह भी दिखाता है कि हमारा वेब सीरीज स्पेस कुछ नया क्रांतिकारी करने और बंदिशों को तोड़ने की जगह ‘सेल्फ सेंसरशिप’ में जरूरत से ज्यादा विश्वास करने लगा है.

ओरिजनल ‘हॉस्टेजेस’ की तरह हॉटस्टार की इस सीरीज में भी कई वही सारे घटनाक्रम मौजूद हैं जिन्हें देखते हुए आप बार-बार कहेंगे कि ऐसा होना मुमकिन ही नहीं है. लेकिन चूंकि मौलिक सीरीज तेज रफ्तार और कम अवधि वाले दस एपीसोड में अपनी कथा कहकर खालिस बिंज-वर्थी सिद्ध हुई थी इसलिए शिकायतें रहने के बावजूद आप इस सीरीज को वीकेंड में एक-दो बार में खत्म करने का मोह छोड़ नहीं पाएंगे. इसके कुछ ट्विस्ट्स एंड टर्न्स भी काफी दर्शनीय हैं और अंत तक आपको आनंद की अनुभूति देते रहेंगे.

लेकिन, हॉटस्टार की तुलना में नेटफ्लिक्स पर मौलिक इजराइली सीरीज देखकर आनंद की अनुभूति तुलनात्मक रूप से बहुत ज्यादा होगी! क्योंकि एक तो एक चीज होती है ‘मौलिक शुद्धता’, जिसका जिक्र हम अपने पहले के कुछ लेखों में कर चुके हैं और आप उसके बारे में यहां पढ़ सकते हैं. इस मौलिक शुद्धता की वजह से इजराइली सीरीज हिंदुस्तानी अनुवाद से कई गुना बेहतर हो जाती है.

दूसरा और ज्यादा अहम कारण है कि तमाम कमियों के बावजूद अगर इस इजराइली सीरीज के पहले सीजन ने आखिर तक बांधे रखा था तो वह इसके पॉपकॉर्न एंटरटेनमेंट की जद में आने वाले ट्विस्ट एंड टर्न्स नहीं थे. बल्कि इसकी मुख्य नायिका इजराइली अभिनेत्री अयलेट जूरर का शानदार अभिनय था. हरदम शांतचित्त रहने वाली और मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए ठंडे दिमाग से सोचने वाले डॉक्टर किरदार को उन्होंने अभूतपूर्व तरीके से आत्मसात किया था. ऐसी परिस्थितियों में अक्सर किरदार लाउड हो जाते हैं लेकिन इस अभिनेत्री ने जो नियंत्रित अभिनय किया और देखने वाले को अपने दम पर आखिरी सीन तक बांधे रखा वह लाजवाब अभिनय की क्षेणी में आता है.

हिंदुस्तानी सीरीज में यही किरदार टिस्का चोपड़ा ने निभाया है और वे इस इजराइली अभिनेत्री के सामने कहीं नहीं टिकतीं. जाहिर तौर पर टिस्का चोपड़ा ने मौलिक सीरीज देखी है इसलिए वे इजराइली अभिनेत्री की तरह ही किरदार को अभिनीत करने की कोशिश करती हैं. लेकिन बदकिस्मती से बिलकुल भी सफल नहीं हो पातीं. कुछ निर्देशन की भी कमियां हैं कि कैमरा उन पर ठहरता कम है. आज के दौर में रीमेक और रूपांतरण धड़ल्ले से बनने से देखने वालों को यह फायदा भी मिलने लगा है कि ओरिजनल फिल्म या वेब सीरीज का ‘विजुअल रेफरेंस’ उनके पास होता है. इससे वे आसानी से समझ लेते हैं कि उन किरदारों को दोबारा अभिनीत करते वक्त हमारे अपने एक्टर कितने पानी में हैं.

रोनित रॉय काफी सधा हुआ अभिनय करते हैं. खुशी की बात है कि जितना स्क्रीन स्पेस उन्हें इस सीजन में मिला है उससे ज्यादा दूसरे में मिलने वाला है. ओरिजनल सीरीज के अभिनेता ने जो रेंज अपने अभिनय में दिखाई थी वही रोनित रॉय भी हिंदुस्तानी रूपांतरण में दिखाते हैं और प्रभावित करते हैं. उनके अलावा सीरीज के बाकी किरदार उतना ही प्रभाव छोड़ते हैं कि सीरीज खत्म हो जाने के बाद याददाश्त से छूटते चले जाते हैं.

अंत में उन दर्शकों को भी याद कर लेते हैं जिन्हें देसी कलाकारों के साथ अपनी भाषा में विदेशी कहानी देखना सुहाता है. माफ कीजिएगा, लेकिन आप लोगों के लिए भी यह सीरीज मुफीद नहीं है. इसके केवल ट्विस्ट्स एंड टर्न्स ही आपको कुछ पलों तक मिलने वाली त्वरित तृप्ति दे पाएंगे. और सीरीज खत्म होने के बाद देर तक पछतावा अलग रहेगा, कि काश सत्याग्रह की सलाह मानकर ओरिजनल सीरीज ही देख ली होती!