बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को उत्तर प्रदेश उपचुनाव के मैदान में अकेले उतरने का एलान किया. साथ ही, उन्होंने सपा और रालोद के साथ गठबंधन को बेकार करार दिया. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. मायावती ने कहा, ‘लोकसभा के बीते चुनाव में यादव जाति के वोट बसपा को नहीं मिले. यहां तक कि खुद यादव परिवार भी यादवों के वोट हासिल कर पाने में नाकामयाब रहा.’ वहीं. बसपा सुप्रीमो का कहना है कि यादवों के वोट सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसी) और कांग्रेस के खाते में गए हैं. मायावती के इस बयान के बाद सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के टूटने के कयास लग रहे हैं.

स्कूलों में हिंदी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने के प्रस्ताव को वापस लिया गया

देशभर के स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने वापस ले लिया है. इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में शामिल किया गया था. अब स्कूली भाषा और मातृभाषा के अलावा तीसरी भाषा का चयन खुद छात्र करेंगे. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक इस प्रस्ताव का दक्षिण भारत के राज्यों खासकर तमिलनाडु में सख्त विरोध किया गया था. डीएमके सहित अन्य राजनीतिक दलों ने गैर-हिंदी राज्यों पर इस भाषा को थोपने का आरोप लगाया था. वहीं, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है, ‘सरकार का किसी पर कोई भाषा थोपने का इरादा नहीं है. हम सभी भारतीय भाषाओं के विकास के लिए काम कर रहे हैं.’

कानून मंत्री और कानून मंत्रालय न्यायिक नियुक्तियों के मामले में खानापूर्ति की भूमिका नहीं निभाएंगे : रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने न्यायिक नियुक्तियों के मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि वे और उनका मंत्रालय न्यायिक नियुक्तियों के मामले में खानापूर्ति की भूमिका नहीं निभाएंगे. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ‘अपना (सरकार) पक्ष रखेंगे और नियुक्तियों को तेज करने के लिए अदालत के साथ बातचीत में बने रहेंगे.’ हालांकि, रविशंकर प्रसाद ने साफ किया कि वे कॉलेजियम को उचित सम्मान दे रहे हैं. वहीं, उन्होंने निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए गठित करने पर जोर दिया. बताया जाता है कि देशभर की जिला और अन्य निचली अदालतों में अधिकारियों के 5,000 से अधिक पद खाली हैं.

असम : मोहम्मद सनाउल्ला को विदेशी घोषित करने वाले पुलिसकर्मी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

कारगिल युद्ध लड़ने वाले मोहम्मद सनाउल्ला को विदेशी घोषित करने वाले पुलिसकर्मी चंद्रमल दास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस मामले में तीन कथित गवाहों ने चंद्रमल पर फर्जी बयान लिखने का आरोप लगाया है. इनमें एक का कहना है कि पुलिस न तो उससे कभी मिली और न ही कभी बयान दर्ज कराया. वहीं, सनाउल्लाह के परिजनों ने असम बॉर्डर पुलिस और चंद्रमल के खिलाफ गुवाहाटी हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की बात कही है. इससे पहले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर दिया था. इसके बाद उन्हें परिवार सहित डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया. बताया जाता है कि 23 मई को जारी आदेश में ट्रिब्यूनल ने कहा है कि सनाउल्लाह इस बात का सबूत देने में विफल रहे हैं कि 25 मार्च, 1971 की तारीख के पहले से वे भारत में रह रहे हैं या वे जन्म से भारतीय नागरिक हैं.

असम : पुलिस पर गलत महिला को डिटेंशन कैंप में रखने का आरोप

असम बॉर्डर पुलिस की कथित गलती की वजह से चिरांग जिले में एक महिला तीन वर्ष से अधिक वक्त डिटेंशन कैंप में बिता चुकी हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक 59 वर्षीय मधुबाला मंडल को साल 2016 में विदेशी होने के आरोप में हिरासत में लिया गया था. बताया जाता है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने मार्च, 2016 में मधुमाला दास के नाम से नोटिस जारी किया था. इस नोटिस में इनके भारतीय नागरिक होने पर शंका जाहिर की गई थी. ट्रिब्यूनल ने मधुमाला को इसका जवाब देने के लिए चार अप्रैल को बुलाया था. हालांकि, इससे पहले पुलिस ने उनकी जगह मधुबाला मंडल को हिरासत में ले लिया. वहीं, पुलिस ने इससे इनकार किया है कि कोई गलत महिला हिरासत में है. चिरांग के एसपी सुधाकर सिंह ने कहा, ‘जब इस मामले पर काम शुरू किया गया था तो उस वक्त वह (महिला) एक दास (सरनेम) के साथ शादी की थी. अपने पति की मौत के बाद उसने एक मंडल से शादी की. टाइटल (सरनेम) में बदलाव की वजह से लोगों का कहना है कि वे दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं.’

महागठबंधन में फिर से नीतीश कुमार के शामिल होने पर राबड़ी देवी को कोई एतराज नहीं

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेत्री राबड़ी देवी ने एक बड़ा बयान दिया है. दैनिक जागरण के मुताबिक उन्होंने कहा है कि महागठबंधन में फिर से नीतीश कुमार शामिल होते हैं तो उन्हें कोई एतराज नहीं होगा. हालांकि, इसके आगे राबड़ी देवी ने साफ किया है कि इस बारे में फैसला महागठबंधन के शीर्ष नेताओं को करना है. वहीं, राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी कहा, ‘तेजस्वी ने लिखित रूप से थोड़े ही कह दिया है कि महागठबंधन के लिए बंद हो गए हैं.’ उन्हें भाजपा को पछाड़ने के लिए सभी दलों को एक साथ आने की अपील की. उधर, बिहार सरकार में मंत्री नीरज कुमार का कहना है कि राज्य में भाजपा, जदयू और लोजपा को जनसमर्थन मिला हुआ है और ये सभी दल एकजुट हैं.