बीते महीने संपन्न लोकसभा के चुनाव में करारी शिकस्त के बाद अब कांग्रेस को महाराष्ट्र में संकट का सामना करना पड़ रहा है. खबरों के मुताबिक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है और पार्टी भी छोड़ दी है. उन्होंने मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े से मुलाकात करके अपना इस्तीफा सौंपा.

इस्तीफा देने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा, ‘मैंने लोकसभा के चुनाव में भी पार्टी के लिए कोई प्रचार नहीं किया. मुझे पार्टी हाईकमान को लेकर कोई संदेह नहीं है. पार्टी हाईकमान की तरफ से ही मुझे महाराष्ट्र विधानसभा में ​नेता प्रतिपक्ष बनने का मौका मिला. मैंने अच्छा काम करने की कोशिश की लेकिन हालात से मजबूर होकर मुझे इस्तीफा देना पड़ रहा है.’

इससे पहले बीती अप्रैल में राधाकृष्ण विखे पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद से भी अपना इस्तीफा दे दिया था. तब उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया था. लोकसभा के पिछले चुनाव में वे महाराष्ट्र की अहमदनगर संसदीय सीट से अपने बेटे सुजय विखे पाटिल को चुनाव लड़वाना चाहते थे. लेकिन राज्य में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के बीच गठबंधन की वजह से उन्हें अपने बेटे के लिए वह सीट नहीं मिल पाई थी.

उसके बाद सुजय विखे पाटिल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शाामिल हो गए थे. भाजपा की टिकट पर अहमदनगर से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने जीत भी दर्ज की थी. उसके बाद से ही राधाकृष्ण विखे पाटिल के भी भाजपा में शामिल होने को लेकर अटकलें लगनी शुरू हुई थीं. इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के साथ मुलाकात भी की है. उस मुलाकात और अब विधायक पद से उनके इस्तीफे के बाद ये अटकलें और तेज हो गई हैं.

इधर, कांग्रेस से निष्कासित किए गए नेता अब्दुल सत्तार ने भी मंगलवार को ही विधायक पद से अपना इस्तीफा दे दिया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के कई नेताओं को कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के नेतृत्व से ‘परेशान’ बताया है. साथ ही कहा है कि कांग्रेस के आठ-दस अन्य विधायक भाजपा के संपर्क में हैं जो जल्दी ही पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं.