बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बाद अब समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी उत्तर प्रदेश उपचुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा, ‘अगर महागठबंधन टूट चुका है तो मैं इस पर गहराई से चिंतन करूंगा. अगर उपचुनाव में महागठबंधन है ही नहीं तो सपा भी अपने बलबूते चुनाव की तैयारी करेगी.’ इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को उपचुनाव के तहत 11 विधानसभा सीटों पर अकेले उतरने का एलान किया था. उन्होंने कहा था, ‘अगर सपा प्रमुख आगे कभी अपने राजनीतिक कार्यों में सफल होते हैं तो हम फिर से मिलकर काम करेंगे. लेकिन अगर वे सफल नहीं होते तो हमारे लिए यही ठीक है कि हम अलग-अलग काम करें.’

पश्चिम बंगाल : भाजपा अब ‘जय श्रीराम’ के साथ ‘जय मां काली’ के भी नारे भी लगाएगी

पश्चिम बंगाल में भाजपा के कार्यकर्ता और समर्थक अब ‘जय श्रीराम’ के साथ ‘जय मां काली’ के भी नारे लगाएंगे. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में यह फैसला लिया गया है. पार्टी का मानना है कि ‘जय मां काली’ के सहारे उसकी पहुंच राज्य के लोगों के बीच मजबूत होगी. साथ ही, उस पर गैर-बंगाली पार्टी होने का ठप्पा भी दूर होगा. बंगाल भाजपा इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष का कहना है कि राज्य में पीढ़ी दर पीढ़ी काली को पूजे जाने की वजह से यह नारा लोगों के बीच अधिक प्रचलित होगा. वहीं, पार्टी ने उन लोगों को आभार देने की बात कही है जिन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कहने पर उसे ‘जय हिंद-जय बांग्ला’ लिखे हुए कार्ड भेजे हैं. भाजपा का मानना है कि राष्ट्रवाद के उत्प्रेरक के तौर पर ‘जय हिंद’ में कुछ भी गलत नहीं है.

खराब हवा के चलते प्रत्येक साल एक लाख शिशुओं की मौत : रिपोर्ट

देश में वायु प्रदूषण की वजह से हर साल एक लाख बच्चों की मौत पांच साल से पहले हो जाती है. नवभारत टाइम्स ने सेंटर ऑफ साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) के हवाले से कहा है कि खराब हवा के चलते प्रत्येक 10,000 बच्चों में से औसतन आठ की मौत हो जाती है. वहीं, पांच साल से कम उम्र के लिए यह आंकड़ा नौ है. उधर, सीएसई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में होने वाली कुल व्यक्तियों की मौत में प्रदूषण की हिस्सेदारी 12 फीसदी है. वहीं, संस्था ने अपनी रिपोर्ट में जल प्रदूषण की भी चर्चा की है. सीएसई की मानें तो देश में 86 जलाशय खतरनाक प्रदूषण की चपेट में हैं. राज्यों में सबसे अधिक जल प्रदूषण कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में है. साल 2011 से 2018 के बीच इन राज्यों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की संख्या में 136 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

उच्च शैक्षणिक संस्थानों को छह महीने के भीतर रिक्त पदों को भरने के निर्देश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की भर्ती के नियमों में बदलाव किया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक अब विश्वविद्यालय और उच्च शैक्षणिक संस्थानों को मौजूदा के साथ-साथ अगले छह महीने में रिक्त होने वाले पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी. यूजीसी के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए संस्थानों को छह महीने का वक्त दिया गया है. आयोग के नए दिशानिर्देश केंद्रीय, राज्य और डीम्ड विश्वविद्यालयों सहित अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होंगे.

जेआरएफ और एसआरएफ में बढ़ोतरी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) और सीनियर रिसर्च फेलोशिप (एसआरएफ) के तहत दी जाने वाली रकम में बढ़ोतरी की है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान में बतौर जेआरएफ दी जाने वाली रकम को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 31,000 रुपये कर दिया गया है. वहीं, एसआरएफ के तहत अब शोधार्थियों को 31,000 रुपये की जगह 35,000 रुपये मिलेंगे. बताया जाता कि इस बढ़ोतरी को एक जनवरी, 2019 से लागू किया गया है. वहीं, उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अब वरिष्ठ शिक्षाविदों और अधिकारियों को विशिष्ट अतिथि शिक्षक के रूप में आमंत्रित किया जाएगा. इन्हे एक व्याख्यान (एक घंटे) के लिए 5,000 रुपये मानदेय दिए जाने की बात कही गई है.

भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों ने चंदे की रकम का ब्योरा चुनाव आयोग को नहीं सौंपा

भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों ने लोकसभा चुनाव के दौरान निर्धारित समय-सीमा के भीतर जुटाई गई दान राशि का अब तक चुनाव आयोग को ब्योरा नहीं सौंपा है. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक आयोग स्थित सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 30 मई तक सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बांड से जुटाए गए चंदे का ब्योरा चुनाव आयोग को देना था. वहीं, चुनाव आयोग ने इससे पहले सभी दलों को चुनावी बांड से जुटाए गए चंदे का ब्योरा देने की लिखित तौर पर ताकीद की थी. बीती 12 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने राजनीतिक दलों को दानदाताओं की सूची सीलबंद लिफाफे में आयोग को 30 मई तक सौंपने का आदेश दिया था.