बीते महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ चल रहे व्यापार युद्ध में एक और कदम आगे बढ़ा दिया. उन्होंने चीन को बड़ा झटका देते हुए उसके 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर आयात शुल्क में ढाई गुना तक बढ़ोतरी कर दी . इसके चलते अमेरिका में चीनी सामान की कीमत में 10 से 25 फीसदी तक का उछाल आ गया. अमेरिका के इस कदम पर चीन ने प्रतिक्रिया देते हुए जल्द ही इसका जवाब देने की बात कही. उसने अगले ही दिन 60 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों पर 25 फीसदी का आयात शुल्क लगा दिया.

इसी मसले पर बीते हफ्ते चीन से एक और खबर आई है. इसके मुताबिक चीन ने अमेरिकी सोयाबीन का आयात फिलहाल बंद करने का फैसला किया है. आर्थिक मामलों की चर्चित समाचार वेबसाइट ब्लूमबर्ग के मुताबिक चीनी सरकार ने किसी भी अमेरिकी सोयाबीन निर्यातक कंपनी को नया ऑर्डर नहीं देने का निर्णय लिया है. यानी पिछले महीनों में जो ऑर्डर दिए जा चुके हैं, अब केवल वही सोयाबीन अमेरिका से आएगा.

अमेरिका इस समय दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक देश है. सोयाबीन की खेती उसकी कृषि की रीढ़ की तरह मानी जाती है. जाहिर है, ऐसे में इस खबर ने अमेरिकी किसानों और कृषि विभाग को चिंतित कर दिया है.

चीन में सोयाबीन की बड़ी खपत

सोयाबीन वैश्विक खाद्य श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, खासकर सूअर और मुर्गी के उत्पादन में प्रोटीन का यह सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है. एक रिपोर्ट के अनुसार चीन की बड़ी जनसंख्या की वजह से बीते कुछ सालों में वहां मांस की खपत 250 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है. इसी वजह से चीन में सोयाबीन की मांग भी बढ़ी है.

चीन पशु आहार के लिए पर्याप्त सोयाबीन का उत्पादन नहीं कर पाता है और इसलिए अमेरिका और ब्राजील सहित कई देशों से बड़ी मात्रा में सोयाबीन आयात करता है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में चीन ने पूरी दुनिया का दो-तिहाई सोयाबीन अकेले खरीदा जिसका 60 फीसदी हिस्सा अमेरिका से आने वाले सोयाबीन का था. बीते साल जारी हुए आंकड़ों को देखें तो 2017 में अमेरिका से चीन जाने वाले सबसे ज्यादा कीमत के उत्पादों में हवाई जहाज के बाद सोयाबीन ही था. ऐसे में जाहिर है कि चीन के सोयाबीन न खरीदने की सीधी मार अमेरिकी किसानों को झेलनी पड़ेगी.

चीन के लिए अमेरिकी सोयाबीन बड़ा हथियार क्यों है?

अमेरिकी जानकारों की मानें तो अमेरिका से चल रहे व्यापार युद्ध में चीन ने यह चाल काफी सोच समझकर चली है. इन लोगों के मुताबिक चीन अच्छे से जानता है कि अमेरिका से आने वाले उत्पादों में सोयाबीन ही ऐसा उत्पाद है जिससे अमेरिकी सरकार को दबाव में लाया जा सकता है.

बीते साल जब चीन ने बदले की कार्रवाई के तहत अमेरिकी सोयाबीन पर आयात शुल्क 25 फीसदी तक बढ़ा दिया था तो अमेरिका में इसका बड़ा असर देखने को मिला था. अमेरिका में सोयाबीन की कीमतों में अचानक गिरावट आ गई थी जिसकी मार वहां के किसानों को झेलनी पड़ी. हालात इतने खराब होने लगे कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को सोयाबीन के किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की कृषि सब्सिडी देने की घोषणा करनी पड़ी.

अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन इस मुद्दे को लेकर कितना चिंतित है, इसका पता बीते साल अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच हुए एक समझौते से भी चलता है. यह समझौता दोनों के बीच व्यापार युद्ध खत्म करने के लिए हुआ था और इसमें ट्रंप ने यूरोप के सामने पहले से कई गुना ज्यादा सोयाबीन खरीदने की शर्त रखी थी. दरससल, ऐसा करके डोनाल्ड ट्रंप चीन से हो रहे नुकसान की कुछ भरपाई यूरोप से करना चाहते थे.

डोनाल्ड ट्रंप पर भी सीधे तौर पर दबाव बनाया जा सकता है

अमेरिकी जानकार एक और बात भी बताते हैं. इनके मुताबिक अमेरिका के ओहायो, आयोवा, नेब्रास्का, इंडियाना और मिसौरी सोयाबीन के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में आते हैं. साथ ही ये सभी राज्य ऐसे भी हैं जहां 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी जीत हुई थी. अगले साल अमेरिका में फिर राष्ट्रपति चुनाव है जिसमें रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से डोनाल्ड ट्रंप फिर मैदान में होंगे. जाहिर है कि ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध में चीन के लिए सोयाबीन एक ऐसा हथियार है जिससे सीधे तौर पर भी डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाया जा सकता है.

लेकिन अब चीन सोयाबीन की अपनी जरूरत कैसे पूरी करेगा

ब्लूमबर्ग के मुताबिक चीन को भी बड़ी मात्रा में सोयाबीन की जरूरत है क्योंकि इसके बिना उसके मांस के बाजार पर सीधा असर पड़ेगा. ऐसे में चीन ने कई महीने पहले ही ब्राजील और अर्जेन्टीना जैसे सोयाबीन के अन्य बड़े उत्पादक देशों से बातचीत शुरू कर दी थी. सोयाबीन का आयात बढ़ाने के लिए चीन भारत से भी बातचीत कर रहा है. बीते महीने ही भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया था कि चीन से इस मामले में बातचीत जारी है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही चीन की तरफ से सोयाबीन के बड़े ऑर्डर मिलेंगे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में चीन ने ब्राजील में बड़ी मात्रा में सोयाबीन खरीदा है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नजर रखने वाली ब्राजील की एक संस्था द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल और मई के शुरूआती हफ्ते में चीनी कंपनियों ने ब्राजील में करीब 5.5 मिलियन टन सोयाबीन की खरीददारी की है और यह सोयाबीन जून, जुलाई और अगस्त में ब्राजील के बंदरगाहों से चीन भेजा जाएगा.

ब्राजील के ‘सीपा रिसर्च संस्थान’ के विशेषज्ञ लुसीलो एल्वेस रॉयटर्स से बातचीत में एक और बात भी बताते हैं. उनके मुताबिक पिछले कुछ समय के दौरान ब्राजीली मुद्रा ‘रियाल’ में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट आयी है. इस वजह से अमेरिकी सोयाबीन की तुलना में चीनी कंपनियां को ब्राजील का सोयाबीन सस्ता पड़ रहा है और इसलिए भी वे ब्राजील से सोयाबीन खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही हैं. खबरों के मुताबिक पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान अमेरिकी डॉलर ब्राजीली रियाल की तुलना में तीन फीसदी तक मजबूत हुआ है.