जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन को लेकर लग रही अटकलों पर गृह मंत्रालय ने सफाई दी है. खबरों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल ऐसी कोई कवायद नहीं चल रही है. साथ ही मंत्रालय में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और गृह मंत्री अमित शाह ने भी परिसीमन के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं की है. गृह मंत्रालय की तरफ से यह बात ऐसे समय पर कही गई है जब एक दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों को लेकर मीडिया में कई खबरें आई थीं.

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को जम्मू, कश्मीर घाटी और लद्दाख तीन संभागों में बांटा गया है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक कश्मीर संभाग राज्य की सबसे ज्यादा आबादी वाला इलाका है. इसके 15,948 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में 68,88,475 की आबादी बसती है. साथ ही वहां से राज्य विधानसभा के लिए 46 विधायक चुने जाते हैं. वहीं जम्मू संभाग के 26,293 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल की कुल आबादी 53,78,538 है और वहां विधानसभा सीटों की कुल संख्या 37 रखी गई है. इसी तरह 2.7 लाख की आबादी वाले लद्दाख संभाग को विधानसभा की चार सीटें दी गई हैं.

इधर, कश्मीर की तुलना में जम्मू के बड़े क्षेत्रफल का तर्क देते हुए वहां के स्थानीय नेता विधानसभा सीटों की संख्या को बढ़ाने की मांग कर चुके हैं. वहीं जम्मू संभाग में सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इसलिए भी रुचि मानी जा रही है क्योंकि वहां इसका दबदबा है. दूसरी तरफ कश्मीर संभाग में फारुख अब्दुल्ला ने नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और महबूबा मुफ्ती की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसे दलों का प्रभाव है.

जम्मू-कश्मीर में इससे पहले साल 1995 में विधानसभा सीटों का परिसीमन किया गया था. तब वहां विधानसभा की कुल 111 सीटें तय की गई थीं. लेकिन वहां चुनाव सिर्फ 87 सीटों पर ही कराए जाते हैं क्योंकि बाकी की 24 सीटों को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के लिए रिक्त छोड़ा गया था. इसके बाद 2005 में भी सीटों के परिसीमन की कवायद की जानी थी लेकिन राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने उसे वर्ष 2026 तक रोकने के आदेश दिए थे.