देश में चल रहे निजी स्कूलों को अपने नाम से ‘पब्लिक’ शब्द हटाना पड़ सकता है. केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के मसौदे में इसकी सिफारिश की गई है. अगर इसे स्वीकार किया गया तो अगले तीन सालों में कई प्रतिष्ठित निजी स्कूलों समेत देशभर के निजी स्कूलों को अपने नाम बदलने पड़ेंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए बनाई गई के कस्तूरीरंगन समिति के पैनल ने निजी स्कूलों के नामों पर गौर करने के बाद यह सुझाव दिया है. इसमें उसने कहा है कि केवल सरकारी स्कूलों को ‘पब्लिक’ शब्द का इस्तेमाल करने की इजाजत होनी चाहिए. समिति ने रिपोर्ट में कहा है, ‘निजी स्कूल किसी भी तरह के संचार, दस्तावेज या अपने स्टेटस की घोषणा में ‘पब्लिक’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करेंगे. अगले तीन सालों में सभी निजी स्कूलों में यह बदलाव प्रभावी होगा. पब्लिक स्कूल वही होंगे जो सार्वजनिक फंड से चलते हों, सरकारी हों या सरकार की मदद से चल रहे हों.’

पैनल ने यह सिफारिश भी की है कि स्कूल लाभ कमाने के लिए नहीं होने चाहिए. इसके अलावा समिति ने कहा कि आयकर कानून में नए नियम लाए जाने से राज्य सरकारें निजी स्कूलों को और जिम्मेदार बना सकती हैं. वहीं, समिति ने केवल निजी स्कूलों के नाम बदलने की सिफारिश नहीं की है, बल्कि उसका कहना है कि विश्वविद्यालयों के नामों में भी बदलाव लाना चाहिए. अभी अलग-अलग प्रकार के विश्वविद्यालयों के नामों में ‘मानद’, ‘संबंधक’ या ‘एकल’ जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं. समिति का कहना है कि इन्हें हटा कर सीधे यह बताया जाए कि संबंधित विश्वविद्यालय सरकारी है, निजी है या निजी आर्थिक सहयोग से चलने वाला शिक्षा संस्थान है. नाम बदलने की इन सिफारिशों में स्कूल और विश्वविद्यालय के साथ मानव संसाधन मंत्रालय का नाम भी शामिल है. अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि इस मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय किया जाना चाहिए.