रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन चली बैठक के बाद आज नई ब्याज दरों का एलान कर दिया है. उसने अपने नीतिगत रुख को नरम रखते हुए रेपो दर 0.25 अंक घटाकर छह प्रतिशत से 5.75 प्रतिशत कर दी है. यह लगातार तीसरा मौका है जब आरबीआई ने रेपो दर में कमी की है.

पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने रिवर्स रेपो दर 5.50 प्रतिशत रखी है. वहीं, ऋण की सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) पर ब्याज दर और बैंक दर छह प्रतिशत की गई है. इसके अलावा वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.2 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत किया गया है. साथ ही, 2019-20 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) के दौरान मुद्रास्फीति 3-3.10 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. पिछली समीक्षा में यह अनुमान 2.90-3.0 प्रतिशत का था.

आरबीआई द्वारा रेपो दर में कमी किए जाने की संभावना पहले से जताई जा रही थी. जानकारों के मुताबिक आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ने के चलते केंद्रीय बैंक पर ब्याज दर में कटौती करने का दबाव बढ़ गया था. ऐसे में रेपो दर में की गई कमी हैरान नहीं करती. बता दें कि रेपो दर में कमी होने से लोन सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि यह बैंकों पर निर्भर करता है कि वे ग्राहकों को रेपो दर में कमी का लाभ देते हैं या नहीं.

क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई अन्य बैंकों को कर्ज देता है. इसी कर्ज से बैंक ग्राहकों को ऋण की सुविधा मुहैया कराते हैं. अगर रेपो रेट कम होता है तो इसका मतलब है कि बैंक से मिलने वाले सभी प्रकार के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. वहीं, बैंकों को आरबीआई में धन जमा कराने पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.