शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने केंद्र में एक बार फिर भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार बनने के हवाले से कहा है, ‘यदि इस बार भी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का वादा पूरा नहीं हुआ तो लोग हमे जूते मारेंगे.’ उन्होंने यह बात समाचार एजेंसी एएनआई के साथ एक बातचीत के दौरान कही.
इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘2014 में भी राम मंदिर के निर्माण का वादा किया गया था. लेकिन हम उसे पूरा कर पाने में कामयाब नहीं हो सके. बीते महीने पूरे हुए लोकसभा के चुनाव से पहले भी राम मंदिर के निर्माण का मुद्दा उठा था. साथ ही हमने इसी मुद्दे पर यह चुनाव लड़ा भी है. हम वहां मंदिर निर्माण को लेकर प्रतिबद्ध हैं और मैं समझता हूं कि इस बार वहां मंदिर बनाने का काम शुरू भी होगा.’
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘शिव सेना पहले ही साफ कर चुकी है कि राम मंदिर के लिए सरकार यदि संसद में कोई प्रस्ताव लाती है तो हम उसका समर्थन करेंगे. लोकसभा में अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 350 सांसदों का संख्याबल है. साथ ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अकेले ही 303 संसदीय सीटें जीती हैं. राम मंदिर बनवाने के लिए इससे ज्यादा जरूरत भला और किस चीज की है.’
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर बीते महीने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने भी परोक्ष तौर पर एक बयान दिया था. तब राजस्थान में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था, ‘हमें राम का काम करना है और यह काम होकर रहेगा.’
वहीं बीते हफ्ते राम जन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने भी इस संबंध में एक बयान दिया था. तब उन्होंने जल्दी ही राम मंदिर निर्माण शुरू कराने की बात कही थी. साथ ही यह भी कहा था कि गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को 300 सीटें मिलने पर मंदिर निर्माण शुरू कराने का वादा किया था. लोकसभा के चुनाव में भाजपा को 300 से ज्यादा सीटें मिली हैं, ऐसे में अब इस काम में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.
इधर, अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का मसला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. शीर्ष अदालत ने इस मसले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एफएमआई कलीफुल्ला के नेतृत्व वाली एक मध्यस्थता समिति का गठन किया है. इस समिति में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू को भी शामिल किया गया है. इस समिति ने बीते महीने शीर्ष अदालत को एक रिपोर्ट सौंपकर कुछ और वक्त मांगा था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त तक के लिए इस मुद्दे पर सुनवाई टाल दी थी.
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