देश में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने एक बड़ा फैसला किया है. आरबीआई ने रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) व्यवस्था के जरिये लेन-देन पर लगने वाले शुल्क को खत्म करने की घोषणा की है. खबरों के मुताबिक आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह ऐलान गुरुवार को नीतिगत दरें जारी करने के मौके पर की. इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई की तरफ से इस संबंध में सभी बैंकों को हफ्ते भर में निर्देश भी भेजा जाएगा.

एनईएफटी से ग्राहकों को दो लाख रुपये तक जबकि आरटीजीएस के जरिये इससे अधिक की रकम के लेन-देन की सुविधा मिलती है. हालांकि इस सुविधा का लाभ उठाने वालों से बैंक इसके बदले में तय शुल्क वसूलते हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ही देखें तो वह इसके लिए ढाई रुपये से लेकर 50 रुपये तक का शुल्क लेता है. साथ ही इस शुल्क पर ग्राहक को 18 फीसदी का वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) अलग से देना होता है. निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे बैंक भी इस पर इसी तरह के शुल्क लगाते हैं. अब जबकि आरबीआई ने इसे खत्म करने की बात कही है तो उसने बैंकों से भी ग्राहकों को इसका लाभ देने के लिए कहा है.

इसके साथ ही आरबीआई का यह भी कहना है कि देश में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या बढ़ी है. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग सामान्य फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में सामान्य फोन रखने वाले लोगों को भी तेज गति से किए जा सकने वाली लेन-देन की इस प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने ऑटोमैटिक टेलर मशीन (एटीएम) से निकाली जाने वाली नकदी पर लगने वाले शुल्क को लेकर एक समिति गठित किए जाने की बात भी कही है.