राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) की कवायद में ‘विदेशी’ घोषित किए गए सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार मोहम्मद सनाउल्लाह को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राहत दी है. खबरों के मुताबिक हिरासत शिविर में रखे गए मोहम्मद सनाउल्लाह को हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और असम की राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया है.
इससे पहले बीते महीने एनआरसी में सनाउल्लाह का नाम शामिल नहीं किए जाने का पता चला था जिसके बाद एक न्यायाधिकरण ने उन्हें विदेशी करार दिया था. फिर उन्हें हिरासत में लेते हुए नजरबंद कर दिया गया था. इसके खिलाफ सनाउल्लाह ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील की थी. साथ ही सेना में अपनी सेवाओं और राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किए जाने का हवाला भी दिया था. उनका यह भी कहना था कि उनकी ‘देशभक्ति’ सेना के जरिये सत्यापित करवाई जा सकती है.
इस बीच असम में कांग्रेस के एक सांसद गौरव गोगाई ने सनाउल्लाह की नागरिकता को लेकर चिंता जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी है. साथ ही इस मामले में उनसे संज्ञान लेने और इसकी जांंच शुरू करवाने का अनुरोध किया है. वहीं दूसरी तरफ इस सेवानिवृत्त सैनिक की शिकायतों के आधार पर उसकी नागरिकता की जांच करने वाले असम पुलिस के पूर्व सब इंस्पेक्टर चंद्रमल दास के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.
सनाउल्लाह 21 मई 1987 को भारतीय सेना में शामिल हुए थे. सेना की इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग कोर में काम करते हुए उन्होंने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था. सैन्य सेवा से रिटायर होने के बाद वे सब इंस्पैक्टर के तौर पर असम पुलिस में शामिल हो गए थे.
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