सोशल मीडिया पर तेल कंपनी इंडियन ऑयल की एक कथित चेतावनी तेज़ी से वायरल हो रही है. इसमें वाहन चलाने वालों से कहा गया है कि वे भीषण गर्मी के सीज़न में अपनी गाड़ी की टंकी फ़ुल न करवाएं, अन्यथा उसमें विस्फोट हो सकता है.

फ़ेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप जैसे प्लेटफ़ॉर्मों शेयर हो रहे इस मैसेज में लिखा है, ‘इंडियन ऑयल ने दी चेतावनी... आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि होना तय है, इसलिए अपने वाहन में पेट्रोल अधिकतम सीमा तक न भरवाएं. यह ईंधन टैंक में विस्फोट का कारण बन सकता है. कृपया आप अपने वाहन में आधा टैंक ही ईंधन भरवाएं और हवा के लिए जगह रखें. इस हफ़्ते पांच विस्फोट दुर्घटनाएं अधिकतम पेट्रोल भरने से हुईं... कृपया पेट्रोल टंकी को दिन में एक बार खोल कर अंदर भर रही गैस को बाहर निकलने दें... इस मैसेज को आप अपने परिवार के सदस्यों व अन्य सभी को भेजें, जिससे लोग ऐसी दुर्घटना से बच सकें, धन्यवाद.’

वायरल मैसेज
वायरल मैसेज

सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज पहले भी शेयर होते रहे हैं. भारत ही नहीं दुनियाभर में वाहन चालकों को डराने के लिए इसी फ़ॉर्मेट में संदेश तैयार कर वायरल किया जाता रहा है. आगे की रिपोर्ट से पहले आपको ऐसा ही एक संदेश अंग्रेज़ी भाषा में दिखाते हैं जो कई सालों तक ब्रिटेन और अन्य देशों में काफ़ी वायरल हुआ था.

अन्य देशों में वायरल हो चुका मैसेज
अन्य देशों में वायरल हो चुका मैसेज

अब बात करते हैं इस मैसेज की सच्चाई की. दरअसल, भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें भीषण गर्मी में गाड़ी की टंकी फ़ुल करवाने की वजह से उसमें विस्फोट होने का दावा किया गया हो. बल्कि कई जानकारों की मानें तो टंकी फ़ुल करवाना ज़्यादा सुरक्षित है. वे बताते हैं कि टंकी फ़ुल करवाने की वजह से उसमें हवा की मात्रा कम बनी रहती है, जिसके चलते उसमें ऑक्सीज़न नहीं रहती.

यह विज्ञान का सामान्य ज्ञान है कि आग एक केमिकल प्रतिक्रिया का परिणाम होती है जिसके लिए ईंधन, ऑक्सीज़न और गर्मी की ज़रूरत होती है. लेकिन इन इनकी मौजूदगी के बावजूद किसी बंद चीज़ में आग तब तक नहीं लगेगी जब तक ये तीनों उसमें उचित मात्रा में मौजूद न हों. तो पहली बात यह कि गाड़ी की ईंधन टंकी पूरी भरने से उसमें हवा नहीं बचेगी. ऐसे में विस्फोट होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. वहीं, टंकी को डिज़ाइन ही इस तरह से किया जाता है कि कम ईंधन में भी उसमें हवा का दबाव नहीं रहता.

1960 तक ऑटोमोबाइल कंपनियां ईंधन टंकी में दबाव बनने से रोकने के लिए गाड़ियों में गैस कैप बनाती थीं. इसमें एक छेद होता था जो टंकी में हवा को टिकने नहीं देता था. लेकिन इससे ईंधन लीक हो जाया करता था. इसलिए बाद में गाड़ियों में वाष्पीकरण उत्सर्जन नियंत्रण सिस्टम लाया गया. यह बाहरी हवा के साथ संतुलन बनाने के बजाय एक गैस लाइन के ज़रिये दबाव को स्थिर बनाए रखता है, लेकिन ईंधन को बाहर फैलने नहीं देता और उसे वापस टंकी में भेज देता है.

तो अब आप अपनी गाड़ी की टंकी को जितना चाहें उतना भरवा सकते हैं. अगर किसी गाड़ी की टंकी में ईंधन कम या ज़्यादा होने की वजह विस्फोट होने लग जाए तो देखते ही देखते दुनियाभर में ट्रैफ़िक कम हो जाए. हमारी जांच में सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा झूठा साबित हुआ है.

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)