जापान की कार निर्माता कंपनी टोयोटा ने अपनी पहली प्रीमियम हैचबैक की शक्ल में ग्लैंजा को भारतीय बाज़ार में उतार दिया है. यह कार मारुति-सुज़ुकी की प्रीमियम हैचबैक बलेनो का टोयोटा वर्ज़न है. टोयोटा और सुज़ुकी के बीच बीते साल एक क़रार हुआ था जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों कंपनियों के बीच उत्पादन और तकनीक साझा किए जाने की बात कही गई थी. ग्लैन्ज़ा, टोयोटा-सुज़ुकी के बीच हुई उसी साझेदारी की पहली पेशकश है.

यदि टोयोटा ग्लैंजा के लुक्स की बात करें तो यह हूबहू बलेनो जैसी ही नज़र आती है. यहां तक कि डोर, डोर हैंडल्स, बूट लिप और विंडो लाइन भी दोनों गाड़ियों में एक सी ही है. गाड़ी का व्हील रिम भी इसी फेहरिस्त में शामिल है. फ़र्क सिर्फ़ पहियों पर लगी सेंटर कैप का है जिस पर सुज़ुकी की बजाय टोयोटा का मार्क लगा है. हालांकि ग्लैन्ज़ा में कुछ बदलाव कर टोयोटा ने इसे अपना टच देने की कोशिश भी की है. इनमें से प्रमुख कार के फ्रंट लुक में दिखते हैं. यहां आपको टोयोटा के बैज के साथ नई ग्रिल, फ्रंट बंपर और हैडलैंप्स का नया सेट नज़र आता है. वहीं रियर पार्ट में दिए गए बदलावों में टेल लैंप का डिज़ायन प्रमुख हैं.

नई जनरेशन के हार्टेक्ट आर्किटैक्चर पर बनी होने के अलावा टोयोटा ग्लैंजा में मिलने वाली अन्य खूबियों में- डीआरएल के साथ दिए गए एलईडी प्रोजेक्टर ऑटोमेटिक हेडलैंप्स और फॉलो मी होम फंक्शन (इसमें गाड़ी को बंद करने के कुछ देर बाद तक भी हेडलैंप्स जलते रहते हैं ताकि अपने गैरेज से घर तक पहुंचने के दौरान आपको उचित रोशनी मिलती रहे) शामिल हैं. इसके अलावा इसमें डायमंड कट अलॉय व्हील्स, इंजन स्टार्ट/स्टॉप बटन के साथ स्मार्ट एंट्री, 60:40 स्प्लिट रियर सीट्स, इलेक्ट्रिक एडजस्ट आउटसाइड रियर व्यू मिरर (ओआरवीम) और ऑटोमेटिक एसी जैसे प्रीमियम फीचर्स भी हैं.

टीएफटी मल्टी इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले | टोयोटा
टीएफटी मल्टी इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले | टोयोटा

टोयोटा ग्लैंजा में टीएफटी मल्टी इन्फॉर्मेशन डिस्प्ले, एपल कार प्ले, एंड्रॉइड ऑटो और नेविगेशन के साथ टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, वॉइस कमांड के साथ स्टीयरिंग माउंटेड ऑडियो और कॉलिंग कंट्रोल जैसी खासियतें भी देखने को मिलती हैं. यदि सुरक्षा के लिहाज़ से देखें तो ग्लैंजा के साथ डुअल फ्रंट एयबैग्स, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस), इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक फोर्स डिस्ट्रिब्यूशन (ईबीएस), ब्रेक असिस्ट (बीए) और आईएसओफिक्स चाइल्ड सीट जैसे फीचर्स स्टैंडर्ड तौर पर आते हैं.

टोयोटा ने फिलहाल ग्लैंजा के सिर्फ़ पेट्रोल फ्युअल ट्रिम और दो वेरिएंट- ‘जी’ और ‘वी’ लॉन्च किए हैं. इस कार के जी वेरिएंट के साथ टोयोटा ने दमदार लीथियम आयन बैटरी वाला माइल्ड हाइब्रिड सिस्टम भी दिया है. यह सिस्टम सिग्नल जैसी जगहों पर इंजन के चालू, लेकिन कार के निष्क्रिय खड़ी रहने पर इंजन को पॉवर सप्लाई देता रहता है जिससे कार की माइलेज में इज़ाफ़ा देखने को मिलता है. इसके अलावा हाइब्रिड सिस्टम में लगी बैटरी इंजन को अतिरिक्त ताकत देने के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन घटाकर प्रदूषण को भी कम करती है.

परफॉर्मेंस के मामले में ग्लैंजा के साथ बीएस-छह मानकों पर खरे उतरने वाले दो नए इंजन दिए गए हैं. इनमें जी वेरिएंट के साथ- 1.2 लीटर के12एन इंजन मिलता है. माइल्ड हाइब्रिड मोटर के साथ जुड़ा यह इंजन 89 बीएचपी अधिकतम पॉवर के साथ 113 एनएम का टॉर्क पैदा करने में सक्षम है. वहीं कार के वी वेरिएंट के साथ 1.2 लीटर का के12एम इंजन दिया गया है. बिना माइल्ड हाइब्रिड सिस्टम का यह इंजन 82 बीएचपी पॉवर के साथ 113 एनएम का टॉर्क उत्पन्न करता है. टोयोटा ने ग्लैंजा के साथ 5-स्पीड मैनुअल के साथ 7-स्पीड कंटीन्युअस वेरिएबल ट्रांसमिशन (सीवीटी) विकल्प के तौर पर दिया है. कार का जी मैनुअल ट्रिम सेगमेंट की सबसे बेहतरीन यानी 23.87 किमी/लीटर, जी सीवीटी ट्रिम 19.56 किमी/ली और वी ट्रिम 21.01 किमी/ली की माइलेज देता है.

कीमत के मामले में ग्लैंजा के लिए टोयोटा ने 7.22 रुपए (एक्सशोरूम) से शुरुआत की है जो 8.90 लाख रुपए तक जाती है. यदि बलेनो से तुलना कर के देखें तो यह कार सिर्फ़ उन ग्राहकों के लिए सटीक विकल्प बन सकती है जो टोयोटा के मुरीद हैं. इसके अलावा ग्लैंजा के साथ स्टैंडर्ड तौर पर मिल रही फर्स्ट इन क्लास एक लाख किलोमीटर/तीन साल की वारंटी भी कुछ ग्राहकों को लुभा सकती है. लेकिन कार के साथ दिए कम वेरिएंट ऑप्शन, तकरीबन समान फीचर्स और ज्यादा कीमत के चलते ग्लान्ज़ा, बलेनो से उन्नीस ही नज़र आती है. हालांकि ग्लैंजा ह्युंडई आई-20 और होंडा जैज़ जैसी कारों की परेशानी ज़रूर बढ़ा सकती है जिनका बाज़ार प्रदर्शन पहले ही बलेनो की वजह से जबरदस्त प्रभावित हुआ है.

वाहन बीमा की दरें बढ़ेंगी

इस महीने की 16 तारीख से कार और बाइक जैसे वाहनों के थर्ड पार्टी इंश्योरेंस (टीपीआई) प्रीमियम चुकाने के लिए उपभोक्ताओं को अपनी जेब और अधिक ढीली करनी पड़ेगी. इससे पहले इसकी दरों में प्रत्येक साल एक अप्रैल से बदलाव किया जाता था. खबरों के मुताबिक इन वाहनों के लिए टीपीआई की प्रीमियम दरों में 21 फीसदी तक इजाफा किया गया है. इस बारे में बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बताया कि 1,000 सीसी तक छोटी कारों के प्रीमियम में 12 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. यानी अब इन वाहनों के लिए 1,850 रुपये की जगह 2,072 रुपये चुकाने होंगे.

वहीं 1,000 से 1,500 सीसी कारों के लिए बीमा शुल्क में 12.5 फीसदी इजाफा होने से यह 3,221 रुपये हो गया है. हालांकि, 1,500 सीसी से ऊपर की क्षमता वाले वाहनों के प्रीमियम में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. दूसरी ओर, 75 सीसी तक के दोपहिया वाहनों के लिए प्रीमियम 482 रुपये और 150 सीसी तक के लिए 752 रुपये तय किया गया है. इनके अलावा 150-350 सीसी वाली बाइक का प्रीमियम 985 रुपये से बढ़ाकर 1,193 रुपये कर दिया गया है. वहीं, ई-रिक्शा को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है.

पंक्चर होने वाला दुनिया का पहला टायर

फ्रांस की टायर निर्माता कंपनी मिशेलिन और अमेरिकी ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स ने मिलकर कभी न पंक्चर होने वाले टायर का निर्माण किया है. इस टायर की अन्य बड़ी खूबी यह भी है कि इसमें हवा डालने की ज़रूरत भी नहीं पड़ती. इस टायर को अपटिस नाम दिया गया है यानी यूनीक पंक्चरप्रूफ टायर सिस्टम. इन कंपनियों का दावा है कि उनका यह टायर बिना किसी बाधा के यात्रा करने में अभूतपूर्व मददगार साबित होगा. ख़बरों के मुताबिक इस टायर को 2024 तक दुनियाभर में यात्री वाहनों के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा. फिलहाल इस टायर के प्रोटोटाइप की टेस्टिंग शेवरले बोल्ट-ईवी कार के साथ की जा रही है. संभावना है कि साल के अंत तक इस टायर की रियल वर्ल्ड यानी वास्तविक हालात में टेस्टिंग शुरु कर दी जाएगी.

जानकारी के अनुसार मिशेलिन अपटिस पर पिछले 5 साल से काम कर रही थी. इस टायर के व्यावसायिक वर्ज़न को बनाने के लिए कंपनी ने 50 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ एक नए प्लांट की भी स्थापना की है. कंपनी का यह भी दावा है कि उसने अपटिस को भविष्य के मद्देनज़र तैयार किया है और यह टायर हर तरह के वाहन में इस्तेमाल किया जा सकता है. मिशेलिन की मानें तो अपटिस की मेंटेनेंस ज़ीरो है.

आंकड़ें बताते हैं कि पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष 20 करोड़ टायर सिर्फ़ पंक्चर और सड़कों पर होने वाले नुकसान की वजह से ख़राब हो जाते हैं. इसकी प्रमुख वजह टायरों में अपर्याप्त हवा का होना भी है. ऐसे में अपटिस एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. हालांकि अभी तक इसकी कीमतों के बारे में खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन यह तय है कि साधारण टायरों से इसकी कीमत ज्यादा रहने वाली है. देखने वाली बात होगी कि यह भारत जैसे विकासशील देशों के ग्राहकों के बजट से मेल खा पाएगा या नहीं! हालांकि बड़ी मात्रा में खरीद की वजह से वाहन निर्माता कंपनियों को (अन्य उत्पादों की तरह) यह टायर भी अपेक्षाकृत सस्ता पड़ेगा. ऐसे में नई गाड़ियों के साथ जुड़कर अपटिस आम ग्राहक तक पहुंच सकता है.