जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए बलात्कार और हत्या के मामले में विशेष अदालत ने फ़ैसला सुना दिया है. पंजाब के पठानकोट स्थित इस अदालत ने सात में से छह आरोपितों को दोषी ठहराया है जबकि एक को बरी कर दिया गया है. एक मामले में एक नाबालिग पर भी आरोप है जिसका मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है. इस मामले के तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है और बाकी तीन दोषियों, जिन पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ का आरोप था, पांच-पांच साल कैद की सजा मिली है.

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में खानाबदोश बकरवाल समुदाय की एक आठ वर्षीय बच्ची का बीते साल 10 जनवरी को अपहरण हो गया था. एक हफ्ते बाद जंगल से उसका शव बरामद हुआ था. क्राइम ब्रांच की चार्जशीट के मुताबिक अपहरण के बाद पीड़ित बच्ची को एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था. इस दौरान नशीली दवाएं देकर उसके साथ बार-बार बलात्कार किया गया. पुलिस ने इस मामले में मंदिर के पुजारी सहित सात लोगों को आरोपित बनाया है, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. मामले की सुनवाई बंद कमरे में तीन जून को पूरी कर ली गई थी. फैसला आज यानी 10 जून को सुनाया जाना तय हुआ था.

यह बहुचर्चित मामला तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार के लिए विवाद का विषय बन गया था. मामले में क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार लोगों के समर्थन में हिंदू एकता मंच की रैली में भाग लेने के लिए भाजपा को अपने दो मंत्रियों चौधरी लाल सिंह और चंदर प्रकाश गंगा को बर्खास्त करना पड़ा था. मामले में जब पुलिस चार्जशीट दायर करने जा रही थी तो कुछ लोगों ने उसका रास्ता रोक लिया था. अभियुक्तों के पक्ष में रैलियां निकाली गई थीं. इसे देखते हुए मामले में सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा. उसने आदेश दिया कि मामले की सुनवाई जम्मू से बाहर पठानकोट में हो.