सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रशांत कनोजिया को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है. पुलिस शनिवार को उन्हें उनके घर से उठा कर ले गई थी. उसके बाद पत्रकार की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक आज इस मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत कनोजिया की गिरफ्तारी का मामला नहीं बनता. कोर्ट ने कहा, ‘पुलिस उनके खिलाफ केस चला सकती है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हो सकती.’

उधर, यूपी पुलिस ने कनोजिया की गिरफ्तारी का बचाव किया. उसने कोर्ट से कहा कि कनोजिया पहले भी भड़काऊ ट्वीट करते रहे हैं. खबर के मुताबिक पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने कोर्ट को बताया, ‘उन्होंने पहले भी भड़काऊ ट्वीट किए हैं. न सिर्फ जाति से जुड़े मामलों में, बल्कि देवी-देवताओं के लिए भी. इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया.’

वहीं, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने कहा, ‘हमें इस पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं हैं कि (प्रशांत कनोजिया के) के पोस्ट किस तरह के हैं. सवाल यह है कि कनोजिया को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किया गया या नहीं.’ पीठ ने यह भी साफ किया कि प्रशांत कनोजिया की रिहाई के आदेश का मतलब उनके ट्वीट का समर्थन नहीं है.