निर्देशक : साहिल संघा, अजय भूयन

लेखक (हिंदी एडप्टेशन) : साहिल संघा, करण शर्मा

कलाकार : सायरस साहूकर, मिनी माथुर, डेंजल स्मिथ, निक्की शर्मा, अनंदिता पगणिस, सुष्मिता मुखर्जी

रेटिंग : 3/5

पिछले कुछ समय से नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो जैसी अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन स्ट्रीमिंग कंपनियां कम अवधि की वेब सीरीज बनाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के प्रयोग कर रही हैं. इस तरह के सिनेमा को ‘शॉर्ट फॉर्म सीरीज’ कहा जा रहा है.

अमूमन ज्यादातर मशहूर वेब सीरीज दस-बारह एपीसोड की होती हैं और हरेक एपीसोड कुछ एक घंटे लंबा होता है. इन लंबी अवधि के एपीसोड की वजह से ही किरदारों और कहानियों को जहीन अंदाज से उभारा जाने लगा है और फिल्मों की तुलना में वेब सीरीज के ज्यादा असरदार होने का श्रेय भी इसी लंबाई को दिया जाता है. टेलीविजन पर आने वाली सीरीज भी पारंपरिक लंबाई से हटकर – जिनमें उन्हें एक घंटे में ढेर विज्ञापन भी समेटना होते हैं – ज्यादा लंबे एपीसोड्स को तवज्जो दे रही हैं. एचबीओ की सीरीज ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ का आठवां सीजन ताजा उदाहरण है जिसमें कि एक से लेकर डेढ घंटे तक के बेहद लंबे एपीसोड रचे गए थे.

लेकिन, इन भारी-भरकम, थकाने वाली और दर्शकों की लंबी अवधि की एकाग्रता मांगने वाली मकबूल वेब सीरीज के इतर वेब सीरीज की दुनिया में कम अवधि के आसानी से देखे जाने वाले कंटेंट की भी रचना होना शुरू हो गई है. ऐसी वेब सीरीज बनने लगी हैं जिनमें एपीसोड की संख्या भी कम है और हर एपीसोड की अवधि भी 30 मिनट से कम है. लेकिन यहां भी शर्त यही है कि इन्हें वेब स्पेस के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना ही होगा. यह इसलिए क्योंकि यूट्यूब पर बहुत पहले से विदेशी और देसी छोटी अवधि के एपीसोड वाली वेब सीरीज मौजूद मिलती रही हैं.

लेकिन अगर आप एक तराजू में नेटफ्लिक्स या एमेजॉन प्राइम वीडियो की कोई लंबी अवधि वाली दमदार सीरीज रखते हैं तो दूसरे में यूट्यूब पर मौजूद सीरीज में से किसी को नहीं रख सकते (‘कोटा फैक्टरी’ जैसी एक-आध को छोड़कर). इसीलिए ‘शॉर्ट फॉर्म सीरीज’ वाला यह नया स्पेस खासा चुनौतीपूर्ण हो चला है क्योंकि उसे कम अवधि में लंबी अवधि वाली मारक स्टोरीटेलिंग के स्तर तक पहुंचना है और अपने प्रस्तोता, यानी कि नेटफ्लिक्स और एमेजॉन प्राइम वीडियो का नाम भी खराब नहीं करना है!

इन शॉर्ट फॉर्म सीरीज के सामने कई चुनौतियां हैं. लंबी अवधि की शानदार वेब सीरीज दर्शकों की ‘व्यूइंग हैबिट्स’ को काफी हद तक बदल चुकी हैं और उनकी इंटेन्सिटी और कहानी की यात्रा का मुख्तलिफ अंदाज दर्शकों के मानस पर छप चुका है. छोटी अवधि के एपीसोड वाली सीरीज का मिजाज लंबी अवधि वाली गंभीर और भारी-भरकम सीरीज से अलग होता है और संतुष्टि के स्तर पर भी ये अलग तरह से असर करती हैं. हाल के समय में कुछ ऐसी उम्दा वेब सीरीज तक आ चुकी हैं जिन्होंने केवल 15-20 मिनट के आठ-दस एपीसोड रखने के बावजूद गजब का असर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों पर छोड़ा है. लेकिन इसका स्वाद लेने के लिए इनसे पारंपरिक वेब सीरीज जैसे स्वाद की अपेक्षा नहीं करना जरूरी है.

सबसे पहले ‘द एंड ऑफ द फकिंग वर्ल्ड’ (2018) की बात करते हैं. इसने 18 से लेकर 22 मिनट की बेहद कम अवधि के केवल आठ एपीसोड रचकर परंपरागत वेब सीरीज के आदी दर्शकों के बीच एक तरह से खलबली मचा दी थी. किसी को उम्मीद नहीं थी कि इसका असर इतना दूरगामी होगा. लेकिन खुद को साइकोपैथ समझने वाले 17 साल के एक लड़के और 18 साल की एक विद्रोही और बिंदास लड़की के घर से भाग जाने की यह अजूबा ब्लैक-कॉमेडी इतनी पसंद की गई कि अब इसके दूसरे सीजन का इंतजार हो रहा है. आप इसे नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.

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एक दूसरा मशहूर नाम ‘फ्लीबैग’(Fleabag) का है, जिसके दूसरे सीजन के बेहद उम्दा होने के चर्चे इस दिनों लगातार हो रहे हैं. इसके दोनों ही सीजन में केवल छह एपीसोड हैं जिनकी अवधि केवल 23 मिनट से लेकर 26 मिनट तक की है. बेहद मकबूल ये सीरीज उस लड़की की कहानी कहती है जो कि गुस्सैल है, भ्रमित है, सेक्स को लेकर प्रयोगवादी है, और अपनी मर्जी की जिंदगी जीती है. अपने ब्रिटिश ह्यूमर से हंसा-हंसाकर लोटपोट कर देने वाली इस सीरीज को आप एमेजॉन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं.

इनके अलावा एमेजॉन प्राइम वीडियो पर ही मौजूद जूलिया रॉबर्ट्स की बेहद प्रशंसित वेब सीरीज ‘होमकमिंग’ केवल आधा घंटे के दस एपीसोड में अपनी भारी-भरकम और मुश्किल कहानी कह चुकी है. नेटफ्लिक्स पर मौजूद ‘रशियन डॉल’ तीस मिनट तक की अवधि के आठ एपीसोड में टाइम लूप में फंसी नायिका की अजीबो-गरीब दास्तां दिखाकर चौंका चुकी है.

और तो और, नेटफ्लिक्स पर हाल के समय में आईं सेरेब्रल पॉल्सी से ग्रस्त एक समलैंगिक की कहानी कहने वाली ‘स्पेशल’ और बीडीएसएम को आधार बनाकर बनी ‘बॉन्डिंग’ नाम की गैर-परंपरागत वेब सीरीज तो क्रमश: 12 से लेकर 17 मिनट तक के आठ एपीसोड और 13 से लेकर 17 मिनट के सात एपीसोड में अपना पूरा सीजन खत्म कर चुकी हैं. ये दोनों ही सीरीज काफी दर्शकों को पसंद आ चुकी हैं और उनके कई घंटों का समय भी बचा चुकी हैं!

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आज के दौर में जब इंटरनेट पर देखे जाने वाले कंटेंट की बाढ़ आई हुई है और ज्यादातर सीरीज कई सारे सीजन का फैलाव लेने के अलावा हर सीजन में भी विस्तार ओढ़कर आपसे ढेर सारा खाली वक्त मांगती हैं, तो ऐसे वक्त में इस शॉर्ट फॉर्म सीरीज को नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम वीडियो जैसी स्ट्रीमिंग सर्विजिस का भविष्य माना जा रहा है.

आज जरूर ये केवल एक विकल्प हैं, और हल्के-फुल्के मिजाज की स्टोरीटेलिंग से ही गंभीर विषयों को एक्सप्लोर कर रहे हैं. लेकिन बहुत जल्द ऑनलाइन कंटेंट के विशालकाय पहाड़ पर चढ़ते-चढ़ते पसीने में नहा जाने वाला दर्शक कम अवधि की इन वेब सीरीज को अपनी पहली पसंद बना सकता है. ढेर सारी वेब सीरीज देखकर थक चुके दर्शकों के लिए आगे चलकर यही शॉर्ट फॉर्म सीरीज ‘बिंज वर्थी’ कहलाई जाने वाली हैं और पारंपरिक लंबी अवधि वाली सीरीज की गुणवत्ता के समकक्ष ही यह सिनेमा भी अपनी विशालकाय उपस्थिति दर्ज कराने वाला है.

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आप पूछ सकते हैं कि ‘माइंड द मल्होत्राज’ की समीक्षा से पहले हमें तकरीबन हजार शब्दों के इस ज्ञान को साझा करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? इसलिए कि एमेजॉन प्राइम वीडियो की यह नई हिंदुस्तानी वेब सीरीज भी केवल 20 से लेकर 25 मिनट तक के नौ एपीसोड में अपनी कहानी कहती है. पहले तो इसे देखते वक्त यह सवाल मन में उठा था कि क्या यह सिटकॉम हमारे लिए अब तक अंजान रहे एक अंतरराष्ट्रीय नए चलन की शुरुआत हिंदुस्तानी वेब स्पेस में भी कर सकता है? फिर पूरी सीरीज देखने के बाद और कहानी की संपूर्णता में कोई कमी नहीं मिलने के बाद जवाब मिला कि हां, अब से हमारे यहां भी ‘शॉर्ट फॉर्म सीरीज’ खूब बनेंगी और ये सीरीज केवल इसकी शुरुआत भर है. हल्का-फुल्का मनोरंजन का एक नया स्पेस बनेगा जो कि पारंपरिक इंटेंस वेब सीरीज के समानांतर फलेगा-फूलेगा.

सिटकॉम का अर्थ होता है चिर-परिचित पात्रों के साथ कुछेक ही लोकेशन्स पर शूट होने वाली और नए विषयों के बहाने पुराने मोटिफ और हास्य को दोहराने-दुहने वाली ‘सिचुएशनल कॉमेडी’. ‘फ्रेंड्स’ से लेकर ‘द बिग बैंग थ्योरी’, ‘द ऑफिस’, ‘हाउ आई मेट योर मदर’ और ‘मॉडर्न फैमिली’ जैसे अमेरिकी-ब्रिटिश सिटकॉम हमारे देश में भी काफी पसंद किए जा चुके हैं. हिंदी भाषी सिटकॉम भी काफी बने हैं और ‘देख भाई देख’, ‘श्रीमान श्रीमती’ से लेकर ‘खिचड़ी’, ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ और आज के समय के पसंदीदा ‘भाबीजी घर पर हैं’ जैसे नाम केवल चंद उदाहरण भर हैं.

वैसे तो पारंपरिक तौर पर ज्यादातर अमेरिकी और ब्रिटिश सिटकॉम में एपीसोड 20 से 30 मिनट लंबे ही होते हैं. इसलिए आप कह सकते हैं कि ‘ला फैमिलिया’ (20016) नाम के इजराइली शो का हिंदी एडप्टेशन होने की वजह से ‘माइंड द मल्होत्राज’ भी सिटकॉम की इसी पुरानी परंपरा का पालन भर कर रहा है. न कि शॉर्ट फॉर्म सीरीज के नए चलन को भारत में शुरू करने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन, अगर आप गौर फरमाएंगे तो पाएंगे कि इसे बनाने वाला एप्लॉज एंटरटेनमेंट हाल के समय में कई विदेशी वेब सीरीज के रीमेक बना रहा है और कोशिश कर रहा है कि सबके एपीसोड्स की अवधि 30 मिनट से कम ही रहे. सुधीर मिश्रा निर्देशिक ‘हॉस्टेजेस’ के सभी एपीसोड्स की अवधि 25 से 30 मिनट तक की थी जबकि मौलिक इजराइली सीरीज में 30 से लेकर 40 मिनट की अवधि वाले कई एपीसोड भी मौजूद थे.

एप्लॉज का अगला हिंदी एडप्टेशन हॉटस्टार के लिए अमेरिकी और ब्रिटिश शो ‘द ऑफिस’ होने वाला है और मौलिक शो की तरह ही इसके भी एपीसोड 30 मिनट की अवधि से कम के ही होने वाले हैं. क्योंकि एप्लॉज ने अभी तक जितनी भी विदेशी वेब सीरीज एडॉप्ट की हैं उनका सीन दर सीन, संवाद दर संवाद केवल हिंदी में अनुवाद भर किया है! कुछ ग्राम भी देसी मौलिकता नहीं दिखाई है, और उम्मीद है कि ‘द ऑफिस’ में भी वो अवधि तक से छेड़छाड़ नहीं करेगा.

फिर, एमेजॉन प्राइम वीडियो पर कुछ वक्त पहले आई ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज!’ नामक हिंदुस्तानी वेब सीरीज के भी सभी 10 एपीसोड की अवधि आधा घंटा ही थी. नेटफ्लिक्स की ओरिजनल हिंदुस्तानी वेब सीरीज ‘लिटिल थिंग्स’ को भी दो सीजन में 13 मिनट से लेकर 26 मिनट तक के छोटे-छोटे एपीसोड से बड़ा बनाया गया था. साफ है, कि धीरे-धीरे और चुपके-चुपके हिंदुस्तानी वेब स्पेस में दाखिल हो चुका ‘शॉर्ट फॉर्म सीरीज’ वाला यह स्पेस आगे चलकर बहुत बड़ा होने वाला है.

‘माइंड द मल्होत्राज’ को इसी शॉर्ट फॉर्म सीरीज के चश्मे से देखने की जरूरत है. अगर आप इसे मौजूदा भारी-भरकम, इंटेंस हिंदुस्तानी वेब सीरीज के सनग्लास लगाकर देखेंगे तो ये आपको सस्ता एंटरटेनमेंट भर लगेगा. जबकि इसे देखने का मुख्य लक्ष्य हल्का-फुल्का लुत्फ लेना होगा चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि यार-दोस्त-मोहब्बत के साथ बैठकर गोद में पॉपकॉर्न-मखाने रखकर इसे किसी वीकेंड पर देखा जाए!

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‘माइंड द मल्होत्राज’ को यह भी फायदा मिलेगा कि जिस ‘ला फैमिलिया’ नामक इजराइली सीरीज पर यह आधारित है, वह न भारतीय नेटफ्लिक्स पर मौजूद है न एमेजॉन प्राइम वीडियो और हॉटस्टार पर. यूट्यूब पर तो इसका ट्रेलर तक ढूंढ़ने पर नहीं मिलता.

लेकिन यहां मौजूद ट्रेलर देखकर समझना मुश्किल नहीं है कि यह सीरीज भी एप्लॉज के बाकी हालिया सिनेमा की तरह सीन दर सीन और कई जगहों पर संवाद दर संवाद हिंदी अनुवाद भर है. सुनने में भी यही आ रहा है कि दीया मिर्जा के पति साहिल संघा और करण शर्मा की लिखी यह सीरीज तकरीबन सारे ही घटनाक्रम मौलिक सीरीज से उठाती है. संवाद जरूर नए सिरे से कई जगह लिखे गए हैं क्योंकि उनमें अलग से नजर आने वाली भारतीयता मौजूद है जो न सिर्फ कल्पनाशील है बल्कि गुणवत्ता वाले हास्य का माद्दा भी रखती है.

अगर आपने मौलिक इजराइली सीरीज देखी है तो जाहिर तौर पर यह सीरीज आपके लायक नहीं है. केवल मिनी माथुर व सायरस साहूकर के लाजवाब अभिनय के लिए इसे आप देख सकते हैं. लेकिन जिन्होंने मौलिक नहीं देखी उनको यहां जरूर मजा आएगा, क्योंकि एडप्टेशन में भारतीयता मिलाते वक्त कहानी की आत्मा मृतप्राय नहीं हुई है और सीरीज बेढब तरीके का अनुवाद कतई मालूम नहीं होती.

ऊपर से अगर आपको अनोखी सिचुएशन्स से निकलने वाली कल्पनाशील कॉमेडी पसंद है और आप खुले दिल के स्वामी/स्वामिनी हैं तो इस हल्की-फुल्की सिटकॉम का ह्यूमर पसंद आने वाली चीज है. हास्य की उपलब्धता यहां कंसिस्टेंट तो नहीं है, कई घटनाक्रम पुरजोर हंसी भी नहीं निकलवा पाते, लेकिन ऐसे कई क्षण आते हैं जहां हंस-हंसकर पेट दर्द भी होता है.

सीरीज का हर एपीसोड एक थैरेपी सेशन है, जिसमें कई सालों से शादीशुदा और तीन बच्चों के अभिभावक हो चुके मिनी माथुर और सायरस साहूकर के किरदार ऋषभ और शेफाली थेरेपिस्ट डेंजल स्मिथ के साथ बैठकर अपने मसाइल साझा करते हैं. हर साझा मसाइल के साथ सीरीज फ्लैशबैक में जाती है और मसाइल को जस्टीफाई करते हुए दिखाने से ह्यूमर पैदा होता है. चूंकि ऐसा सभी एपीसोड में होता है तो सीरीज कभी-कभी नितांत दोहरावग्रस्त भी हो जाती है और ह्यूमर भी असरदार नहीं रहता.

लेकिन कम अवधि के हल्के-फुल्के एपीसोड का यही फायदा है कि ऐसी कमियां आपको ज्यादा नहीं चुभतीं और आप सीरीज पर लौटने के लिए तैयार रहते हैं. वेब सीरीज के इस ‘शॉर्ट फॉर्म’ का फायदा ‘माइंड द मल्होत्राज’ को काफी मिलता है और कई सारी कमियां होने और बार-बार सिनेमाई क्लीशे का उपयोग करने के बावजूद – जैसे वही ओवर द टॉप सास, घर का नौकर जो काम नहीं आराम ज्यादा करता है, बच्चे जो बात नहीं सुनते, पति जो पत्नी से त्रस्त हो जाता है, पत्नी जो पति पर कंट्रोल करना चाहती है – सीरीज वक्त अच्छा काट देती है.

मिनी माथुर और सायरस साहूकर का भी काम बेहद जोरदार है. उम्मीद नहीं थी कि परंपरागत तौर पर एक्टरों में नहीं गिने जाने वाले ये सितारे केवल अपनी मौजदूगी और आपसी कैमिस्ट्री से सीरीज का स्तर काफी ऊपर उठा देंगे. सायरस साहूकर के लिए तो आप इसे जरूर ही देखिएगा, क्योंकि एक तरह से वे इस वेब सीरीज की ‘डिस्कवरी’ हैं. हमारा हिंदी सिनेमा तो उन जैसे जहीन कॉमेडी एक्टर को अब तक जाया ही कर रहा था.