देश में कारों और एसयूवी वाहनों की बिक्री पिछले 18 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मई, 2019 में देश में 2.39 यात्री वाहन (कार, यूवी/एसयूवी और वैन) बिके. जबकि पिछले साल मई में ही ऐसे तीन लाख वाहनों की बिक्री हुई थी. यानी इस बार इसमें 21 प्रतिशत की गिरावट आई है. इससे पहले अप्रैल में यात्री वाहनों की बिक्री में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इस गिरावट का संबंध अर्थव्यवस्था में आई मंदी से है. अखबार की मानें तो नौकरियां घटने और बड़े लोन मिलना मुश्किल होने के चलते बाजार से खरीदार गायब होते जा रहे हैं. वाहन उद्योग से जुड़े लोग भारी डिस्काउंट और मुफ्त उपहार दे रहे हैं. इसके बावजूद उनका स्टॉक बढ़ता जा रहा है.

हाल में ह्युंडई, मारुति, टाटा और महिंद्रा ने अपनी-अपनी लोकप्रिय कारों के नए मॉडल लॉन्च किए, लेकिन खरीदारों ने उनमें रुचि नहीं दिखाई है. ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए चिंता की बात यह भी है कि नए नियमों के चलते अगले साल अप्रैल से वाहनों के दाम बढ़ जाएंगे. वहीं, एसयूवी और लक्जरी कारों में ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ईंधन डीजल के दाम भी बढ़ेंगे. ऐसे में इंडस्ट्री अब सरकार से जीएसटी की दर में कमी करने की गुहार लगा रही है.

इस स्थिति पर सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने कहा कि हालात गंभीर रूप ले चुके हैं. वहीं, ह्युंडई इंडिया के सेल्स हेड विकास जैन कहते हैं, ‘हमने इतना लंबा नकारात्मक समय पहले नहीं देखा. यह बहुत मुश्किल घड़ी है. बाजार कभी-कभी गिरते हैं, लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं थी. हम इसके लिए तैयार नहीं थे.’