चंद्रमा तक पहुंचने के लिए भारत के दूसरे अभियान की तारीख़ घोषित कर दी गई है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख के शिवन के मुताबिक इसी साल 15 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण तय हुआ है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से यह प्रक्षेपण होगा.

एनडीटीवी से बातचीत के दौरान डॉक्टर के शिवन ने बताया, ‘भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने अब तक जितने भी अभियान चलाए हैं, उनमें यह सबसे जटिल है. चंद्रयान-2 मिशन पर लगभग एक हजार करोड़ रुपए ख़र्च हो रहे हैं.’ ख़बरों की मानें ताे मिशन की कुल लागत में से क़रीब 600 करोड़ रुपए तो 3.8 टन वजनी उस उपग्रह की लागत है जो चंद्रमा पर उतरने वाला है. भारत ने चंद्रमा पर अपना पहला उपग्रह ‘चंद्रयान-1’ अक्टूबर-2008 में भेजा था. उसने अगस्त-2009 तक काम किया था.

ख़बरों के मुताबिक अब चंद्रयान-2 मिशन के तहत भारत अपना लैंडर चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर भेज रहा है. यहां अब तक दुनिया के किसी देश ने लैंडर नहीं भेजा है. बल्कि इसकी कोशिश तक नहीं की है. ये लैंडर चंद्रमा पर क़रीब 14 दिन रहेगा. इस दौरान चंद्रमा पर आने वाले भूकंप आदि की माप करेगा. सौर ऊर्जा से संचालित यह उपग्रह चंद्रमा की सतह का भी परीक्षण करेगा.