सिर्फ़ आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई के बाद ही भारत-पाकिस्तान के बीच सार्थक बातचीत हो सकती है. अब तक भारत की ओर से दी जा रही इस दलील का समर्थन पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक़्क़ानी ने भी किया है. हक़्क़ानी अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं.

वॉशिंगटन (अमेरिका) में मीडिया से बातचीत के दौरान हुसैन हक़्क़ानी ने कहा, ‘जब तक पाकिस्तान अपने क्षेत्र में मौज़ूद आतंक के ढांचे को पूरी तरह ख़त्म नहीं कर देता, भारत के साथ उसकी बातचीत बेनतीज़ा ही रहेगी.’ उन्होंने यह भी कहा कि इस वक़्त अगर पाकिस्तान बार-बार भारत से बातचीत फिर शुरू करने की कोशिश कर रहा है तो यह सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय दबाव का ही नतीज़ा है और कुछ नहीं.

ग़ौरतलब है कि इसी महीने 13-14 तारीख़ को किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के सदस्य देशों की बैठक होने वाली है. इस संगठन में भारत-पाकिस्तान दोनों सदस्य हैं. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इमरान खान इस बैठक में पहुंच भी रहे हैं. इसीलिए यह उम्मीद की जा रही है कि शायद दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य करने की फिर कोई पहल हो.