हांगकांग में हिंसा के हालात बने हुए हैं. इस हिंसा की वज़ह नया प्रत्यर्पण कानून बताया जा रहा है, जिसका विरोध हो रहा है. हिंसा की वज़ह से सरकार ने सप्ताह के बाकी दिनों के लिए सरकारी दफ़्तर बंद करने का आदेश जारी किया है.

ख़बरों के मुताबिक 1997 में ब्रिटेन द्वारा हांगकांग को चीन के आधिपत्य में सौंपे जाने के बाद से अब तक का यह सबसे बड़ा हिंसक प्रदर्शन है. हांगकांग हॉस्पिटल अथॉरिटी ने बताया है कि बुधवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) 10 बजे तक हिंसा से प्रभावित हुए क़रीब 72 लोगों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है. ये लोग पुलिस के द्वारा चलाई गई रबर की गोलियों, आंसू गैस के गोलों और मिर्च स्प्रे आदि से बीमार या घायल हुए हैं. हिंसक प्रदर्शनों का सिलसिला रविवार रात से शुरू हुआ था.

हांगकांग की सरकार जो नया प्रत्यर्पण कानून ला रही है उसका हिंसक विरोध हो रहा है. इससे सभी प्रभावित हो रहे है. फिर वे चाहे हांगकांग के निवासी हों या फिर वहां आए विदेशी या चीनी नागरिक. इस कानून में प्रवधान है कि मुक़दमा चलाने के लिए आरोपितों को चीन भेजा जा सकता है. जबकि इसका विरोध करने वालों की दलील है कि इससे हांगकांग में ‘कानून के शासन’ की अहमियत कम होती है.