निपाह वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए आठ वैज्ञानिकों का एक दल केरल के एर्नाकुलम भेजा गया है. इस दल में केरल के इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस वायरोलॉजी और महाराष्ट्र में पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी के वैज्ञानिकों को शामिल किया गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस दल ने फल खाने वाले चमगादड़ों के कुछ नमूने हासिल किए हैं.

जानकारी के मुताबिक निपाह वायरस चमगादड़ों की एक नस्ल में पाया जाता है. साथ ही ऐसे चमगादड़ जिस फल को कुतरते हैं उसमें भी यह वायरस फैल जाता है. ऐसे में किसी फल की पूरी फसल के इस वायरस के प्रभाव में आने का खतरा रहता है. इसके अलावा निपााह से संक्रमित किसी व्यक्ति के जरिये अन्य व्यक्ति तक भी यह वायरस फैलता है.

इधर, इसी महीने केरल में एक छात्र के निपाह वायरस से संक्रमित होने का मामला सामना आ चुका है. इसके बाद 300 से भी ज्यादा लोगों को बुखार, उल्टी और सिर में तेज दर्द की शिकायत के बाद उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. केरल में इस बीमारी के पीड़ितों के इलाज के लिए अस्पतालों में विशेष वार्ड भी बनाए गए हैं.

दक्षिण भारत के इस राज्य के कुछ जिले बीते साल भी निपाह वायरस से प्रभावित हुए थे. तब इसकी वजह से 17 लोगों की मौत भी हो गई थी. वहीं निपाह वायरस की वजह से केरल में फलों के कारोबार के अलावा पर्यटन को भी भारी नुकसान पहुंचा था.