भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं को आने वाले दिनों में राज्यपाल बनाने की चर्चा चल रही है. इनमें कुछ ऐसे हैं जिन्हें या तो लोकसभा चुनावों का टिकट नहीं दिया गया या फिर जिन्होंने खुद को लोकसभा चुनावों या केंद्रीय मंत्रिमंडल से अलग कर लिया था. अगले छह महीनों में कई राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. अनुमान यह लगाया जा रहा है कि इस साल के अंत तक नियुक्त किए जाने वाले राज्यपालों की संख्या तकरीबन एक दर्जन होगी.

अगले महीने यानी जुलाई में चार राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इनमें उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी, गुजरात के राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली और नगालैंड के राज्यपाल पी आचार्य शामिल हैं. इसी तरह अगस्त में दो और सितंबर में तीन अन्य राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. वहीं दिसंबर में एक और राज्यपाल का कार्यकाल पूरा हो रहा है.

2014 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद नियुक्त हुए कुछ राज्यपालों को कार्यकाल विस्तार देने की भी बात चल रही है. लेकिन बताया जा रहा है कि इनकी संख्या बहुत कम होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए लोगों को राज्यपाल के पद पर लाएंगे. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी देखा गया कि बतौर राज्यपाल कुछ ऐसे लोगों की नियुक्ति भी हुई जो भाजपा नेता नहीं रहे हैं बल्कि न्यायपालिका या ब्यूरोक्रेसी से रहे हैं. इस बार भी ऐसे कुछ नामों की चर्चा है.

लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि आने वाले दिनों में भाजपा के किन नेताओं की नियुक्ति राज्यपाल के पद पर हो सकती है. भाजपा के अंदर इन पांच नेताओं को आने वाले दिनों में राज्यपाल के पद पर नियुक्त किए जाने की चर्चा सबसे अधिक चल रही है:

सुमित्रा महाजन

मध्य प्रदेश के इंदौर से कई बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन की गिनती वहां के कद्दावर भाजपा नेताओं में होती रही है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वे लोकसभा अध्यक्ष थीं. लेकिन इस बार के लोकसभा चुनावों में उनके टिकट की घोषणा में पार्टी ने देरी की. सुमित्रा महाजन ने माना कि ऐसा करके पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से उन्हें संकेत दिया जा रहा है कि वे चुनाव न लड़ें. इसलिए वे खुद ही टिकट की दावेदारी से हट गईं. अब जब एक बार फिर से 2014 के मुकाबले ज्यादा बड़ी बहुमत से केंद्र की सत्ता में भाजपा सरकार की वापसी हुई है तो यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें राज्यपाल बना सकते हैं.

कलराज मिश्र

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में कलराज मिश्र बतौर कैबिनेट मंत्री कार्य कर रहे थे. लेकिन पहले कार्यकाल में जब तकरीबन दो साल का समय बचा हुआ था तो वे मोदी मंत्रिमंडल से हट गए थे. वजह यह थी कि उनकी उम्र 75 साल से अधिक हो गई थी. नरेंद्र मोदी सरकार में एक तरह से यह अघोषित नियम रहा है कि 75 साल से अधिक उम्र के लोग सरकार का हिस्सा नहीं होंगे. इसी वजह से मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रहीं नजमा हेपतुल्ला भी मोदी मंत्रिमंडल से खुद ही हट गई थीं. बाद में उन्हें मोदी सरकार ने राज्यपाल नियुक्त किया. ऐसे में यह माना जा रहा है कि कलराज मिश्र को भी खुद ही सरकार से हटने का ईनाम राज्यपाल बनाकर दिया जा सकता है. उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के देवरिया से 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने वाले कलराज मिश्र इस बार लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़े थे.

करिया मुंडा

लोकसभा के उपाध्यक्ष रहे करिया मुंडा के बारे में भी चर्चा है कि उन्हें भी राज्यपाल बनाया जा सकता है. 2009 से 2014 के बीच वे लोकसभा के उपाध्यक्ष रहे हैं. करिया मुंडा झारखंड के खूंटी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं. इस सीट से वे आठ बार सांसद रहे हैं. लेकिन 83 साल के करिया मुंडा को भाजपा ने इस बार टिकट नहीं दिया. खूंटी से पार्टी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को उम्मीदवार बनाया. झारखंड में इसी साल विधानसभा चुनाव भी हैं. इन चुनावों और करिया मुंडा के अनुभव के साथ-साथ उनकी वरिष्ठता को देखते हुए भाजपा के अंदर यह चर्चा चल रही है कि आने वाले दिनों में उन्हें किसी राज्य के राजभवन में भेजा जा सकता है.

सुषमा स्वराज

कुछ दिनों पहले ट्विटर पर उस वक्त सनसनी फैल गई जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सुषमा स्वराज को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनने की बधाई दे डाली. थोड़े ही देर में हर्षवर्धन को उस ट्वीट को ​हटाना पड़ा. यह बात इतनी बढ़ गई कि खुद सुषमा स्वराज को सफाई देनी पड़ी कि उन्हें राज्यपाल बनाए जाने की बात में कोई सच्चाई नहीं है बल्कि यह अफवाह है. लेकिन भाजपा के अंदर चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन करें तो पता चलता है कि सुषमा स्वराज आने वाले दिनों में राज्यपाल बनाई जा सकती हैं. भाजपा सूत्रों का कहना है कि नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह दोनों सुषमा स्वराज को राज्यपाल बनाना चाहते हैं. सुषमा स्वराज ने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर लोकसभा चुनाव लड़ने से मना कर दिया था. भाजपा नेताओं की मानें तो सुषमा स्वराज राज्यपाल बनने की चर्चाओं पर भी यही कह रही हैं कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. इसके बावजूद चर्चा इस बात की है कि वे आने वाले कुछ महीनों में राज्यपाल के पद पर दिख सकती हैं.

बंडारू दत्तात्रेय

तेलंगाना के सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चार बार लोकसभा सांसद रहे बंडारू दत्तात्रेय मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री थे. 2017 के सितंबर में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में उनका पद जाता रहा. इस बार के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया. 72 साल के बंडारू दत्तात्रेय दक्षिण भारत के पुराने भाजपा नेताओं में शुमार किए जाते रहे हैं. वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं. इस बार लोकसभा चुनावों में तेलंगाना में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है. पार्टी की योजना यहां अपनी स्थिति और मजबूत करने की है. इस लिहाज से यह माना जा रहा है कि बंडारू दत्तात्रेय को राज्यपाल बनाया जा सकता है.