‘मेट्रो मैन’ के नाम से मशहूर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) के पूर्व प्रमुख ई श्रीधरन ने दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के प्रस्ताव पर नाखुशी जताई है. उनका कहना है कि इस प्रस्ताव के लागू करते ही एक हजार करोड़ रुपये का सालाना खर्च आएगा. फिर मेट्रो के विस्तार के साथ ही यह खर्च बढ़ता भी चला जाएगा. उनका यह भी कहना है कि 2002 में जब दिल्ली मेट्रो की शुरुआत हुई तो उसी वक्त इसकी यात्रा में किसी को सब्सिडी नहीं देने संबंधी ‘सैद्धांतिक फैसला’ भी कर​ लिया गया था. दिल्ली मेट्रो क्योंकि केंद्र और दिल्ली सरकार का ज्वाइंट वेंचर है ऐसे में इसे लेकर दिल्ली सरकार कोई एकतरफा फैसला नहीं कर सकती. खबरों के मुताबिक ई श्रीधरन ने ये बातें नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर कही हैं.

डीएमआरसी के पूर्व प्रमुख का यह भी कहना है कि दिल्ली सरकार को मुफ्त यात्रा के बजाय डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) का विकल्प अपनाना चाहिए. ऐसा होने से लाभार्थी महिलाओं तक मदद भी पहुंच जाएगी और डीएमआरसी को भी नुकसान नहीं उठाना होगा. श्रीधरन के मुताबिक अगर महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो उस स्थिति में छात्र, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिक भी रियायत की मांग करेंगे. निश्चय ही महिलाओं के समान वे भी इसके हकदार हैं. इसके अलावा दिल्ली के बाद अन्य राज्यों की मेट्रो सेवाओं से भी ऐसी मांगें उठेंगी.

बीते दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो और दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की व्यवस्था लागू कराने की घोषणा की थी. हालांकि विपक्षी नेताओं ने उनकी इस घोषणा को दिल्ली के आगामी विधानसभा के चुनाव से जोड़कर देखा था. साथ ही कई दूसरे नेताओं ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के उस प्रस्ताव को लेकर उनकी आलोचना भी की थी.