भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ कोई भी खेल मुकाबला जिस दिन सिर्फ खेल रह गया उस दिन एशिया या कहें कि विश्व की राजनीति की दिशा बदल जाएगी. उसपर भी अगर खेल क्रिकेट का हो तो इस दिशा के बदलने का कोण कुछ और भी ज्यादा होगा. इसके आगे जाकर यदि यह मैच विश्व कप का हो तो इसका मतलब होगा कि दुनिया की राजनीति 180 अंश का बदलाव देख चुकी है. भारत और पाकिस्तान की जनता इस स्थिति में अचानक नहीं पहुंची. इसकी जड़ में दोनों देशों के इतिहास के अलावा विश्व कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई ऐसी कुछ खास बातें भी हैं जो बार-बार दोनों देशों को उनकी हार-जीत याद दिलाती हैं. विश्व कप में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए पांच मैच और इनमें घटीं ये विशेष घटनाएं अपने अभूतपूर्व रोमांच के लिए हमेशा याद की जाती रहेंगी.

विश्व कप -1992 : सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (ऑस्ट्रेलिया)

यह मैच सचिन तेंदुलकर के लिए याद किया जाएगा. उनके इस पहले विश्व कप में पहली बार भारत-पाकिस्तान आमने-सामने थे. इस मैच में भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 216 रन बनाए. जिसमें सचिन का नाबाद अर्धशतक (54) भी शामिल था. जबकि पाकिस्तान की पूरी टीम 173 रन बनाकर आऊट हो गई. पाकिस्तान की हार में दो विकेटों का जाना टर्निंग प्वाइंट रहा. पहला जावेद मियांदाद और दूसरा आमिर सोहेल. आमिर को सचिन ने ही आउट किया था. सचिन इस मैच के मैन ऑफ द मैच थे.

मियांदाद की मेढक वाली उछल-कूद

पाकिस्तान के शुरुआती विकेट गिरने के बार जावेद मियांदाद और आमिर सोहेल की जोड़ी तेजी से रन बना रही थी. एक समय ऐसा लगने लगा कि भारत मैच हार जाएगा. सो इन बैट्समैनों पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत भारतीय विकेट कीपर किरण मोरे बार-बार अपील करने लगे. एक बार मियांदाद की उनसे झड़प भी हुई. लेकिन वे लगातार ऐसा करते रहे. मियांदाद उनकी इस हरकत से काफी चिढ़े हुए थे. इसी बीच उन्होंने दौड़कर एक रन लेने की कोशिश की और उधर मोरे ने फील्डर से गेंद मिलते ही विकेट की गिल्लियां बिखेर दी. मियांदाद पहले ही सुरक्षित क्रीज में पहुंच चुके थे. लेकिन वे वहां पहुंचकर शांत खड़े नहीं हुए. मोरे को चिढ़ाने के लिए के तीन बार मेढक की तरह उछले. मैदान पर यह ऐसी हरकत थी कि दर्शकों से लेकर खिलाड़ी तक कुछ पल के लिए तो अवाक रह गए फिर इसका संदर्भ समझकर खूब हंसे भी. उस समय तो यह मियांदाद द्वारा चिढ़कर की गई एक क्षणिक प्रतिक्रिया थी जो आज भारत पाकिस्तान के बीच हुए मैचों की सबसे मजेदार छवि बन गई है.

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विश्व कप - 1996 : बैंगलोर (भारत)

विश्व कप के इस क्वार्टर फाईनल मैच में भारत ने पहले बैटिंग करके पाकिस्तान को जीत के लिए 287 रन का लक्ष्य दिया था. भारत की तरफ से वैसे तो सबसे ज्यादा रन (93) नवजोत सिंह सिद्धू ने बनाए थे लेकिन सबसे यादगार पारी खेली अजय जडेजा ने. उनके 25 बालों पर 46 रन और खासतौर पर वकार यूनिस के आखिरी ओवर में 22 रनों की पारी ने भारतीय टीम के आत्मविश्वास को बुलंदियों पर पहुंचा दिया.

सोहेल का तना बल्ला, प्रसाद की बंधी मुट्ठी

जडेजा की बैटिंग से भारतीय टीम में जो आत्मविश्वास आया था उसे पाकिस्तानी जोड़ी- आमिर सोहेल और सईद अनवर ने पहले दस ओवर में ही नेस्तनाबूद कर दिया. वे आठ रन प्रति ओवर की औसत से रन बना रहे थे. इसी बीच वेंकटेश प्रसाद की एक बॉल पर आमिर सोहेल ने चौका मारकर उन्हें बल्ला दिखाते हुआ बाउंड्री की तरफ इशारा किया. इस वक्त पूरी भारतीय टीम बेचारी नजर आ रही थी. लेकिन प्रसाद की अगली ही इन स्विंगर ने कमाल कर दिया. एक बॉल पहले तक जो खिलाड़ी अहंकार के साथ बल्ला घुमा रहा था, उसकी गिल्लियां बिखर चुकीं थीं. इसके बाद भारतीय टीम ने अपना खोया आत्मविश्वास पा लिया. नतीजा यह रहा कि धीरे-धीरे यह मैच पाकिस्तान के हाथों से फिसलने लगा और वह 39 रन से हार गया.

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विश्व कप - 1999 : ओल्ड ट्रेफर्ड मैंचेस्टर (इंग्लैंड)

कारगिल युद्ध के बाद यह मैच दोनों देशों के लिए और खास हो गया था. भारत-पाकिस्तान के बीच विश्व कप का यह लगातार तीसरा मैच था जब भारत ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की. सचिन तेंदुलकर (45), राहुल द्रविड़ (61) और कप्तान अजहरुद्दीन (59) की पारियों की बदौलत भारत 227 रन के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचा था. जबकि इसके जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम इस एकतरफा मैच में 180 रन पर आऊट हो गई.

प्रसाद का श्राप

पाकिस्तान के लिए यह कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं था पर शायद वेंकटेश प्रसाद पिछले विश्व कप की बचीखुची खुन्नस यहां निकालने को तैयार थे. प्रसाद ने इस मैच में सईद अनवर और इंजमाम सहित पांच खिलाड़ियों को 27 रन देकर पैवेलियन भेजा.

विश्व कप - 2003 : सेंचूरियन (दक्षिण अफ्रीका)

दोनो देश तीन साल के बाद कोई मैच खेल रहे थे. यह पहली बार था कि विश्व कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने टॉस जीता और बैटिंग की. पाकिस्तान ने 273 रन बनाए. दक्षिण अफ्रीका की तेज पिच पर कोई यह उम्मीद नहीं कर रहा था कि पाकिस्तानी बॉलरों के सामने भारतीय बल्लेबाज टिक पाएंगे. लेकिन सचिन तेंदुलकर ने विश्व कप की सर्वश्रेष्ठ पारी खेलते हुए 98 रन बनाकर आउट होने से पहले मैच बराबरी का कर दिया. इसके बाद राहुल द्रविड़ और युवराज सिंह की जोड़ी ने 99 रन की भागीदारी कर भारत को आसानी से जीत दिला दी.

सहवाग का तूफान

वसीम अकरम, शोएब अख्तर और वकार यूनिस जब पाकिस्तानी बॉलिंग की कमान संभाल रहे हों तो कौन बैट्समैन होगा जो थोड़े दबाव में न खेले. उस मैच की शुरुआत में सचिन भी पूरी तरह खुलकर नहीं खेल रहे थे. लेकिन वीरेंद्र सहवाग के सामने यह आक्रमण कहीं नहीं टिक पाया. उन्होंने इस मैच में सिर्फ 21 रन बनाए थे लेकिन 14 गेंद खेलकर ही उन्होंने बाकी खिलाड़ियों को समझा दिया कि बॉलरों की इस तिकड़ी को भी भेदा जा सकता है. सहवाग ने अपने कुछ शुरुआती शॉट्स से ही इन तीनों की लाइन-लैंथ ऐसी बिगाड़ी की बाद में आने वाले बल्लेबाजों के लिए वे चुनौती नहीं रहे.

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विश्व कप - 2011 : मोहाली (भारत)

यह टूर्नामेंट का सेमीफाइनल मैच था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी स्टेडियम में मौजूद थे. हालांकि दर्शकों के लिए उनकी उपस्थिति के कोई मायने नहीं थे क्योंकि इस मैच में जीत-हार का मतलब था कि उनकी टीम विश्व कप से बस एक कदम दूर रह जाती या बाहर हो जाती . इस मैच में टॉस जीतकर पहले भारत ने बैटिंग की और 260 रन बनाए. भारत की तरफ से सचिन ने सबसे ज्यादा रन (85) बनाए थे. हालांकि वे अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थे. उन्हें पूरी पारी के दौरान तीन जीवनदान मिले. इसके जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम 231 रन बनाकर आउट हो गई थी. इस मैच में भी सचिन मैन ऑफ द मैच बने.

सचिन नहीं भारत को जीवन दान

सचिन और सहवाग की ओपनिंग जोड़ी में सहवाग अपनी पहचान के अनुरूप ही खेल रहे थे तो सचिन बहुत ही संभले हुए नजर आ रहे थे. इसी बीच पाकिस्तान की तरफ से 11 वें ओवर में सईद अजमल की एक बॉल सचिन के पैड पर लगी और अंपायर ने अपनी उंगली उठा दी. पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा विकेट था. लेकिन सचिन ने डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) मांग लिया. इसमें सचिन नॉट आउट करार दिए गए और फिर उन्होंने 85 रन की पारी खेली.