विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद को एशिया के लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है, ‘आतंकवादियों और उनकी हरकतों के पीड़ितों को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए.’ खबरों के मुताबिक एस जयशंकर ने ये बातें ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित ‘एशिया में बातचीत एवं विश्वास बहाली’ (सीआईसीए) के पांचवें सम्मेलन में दिए अपने संबोधन में कहीं. इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए वे इसी शुक्रवार को ताजिकिस्तान पहुंचे थे.

अपने संबोधन में एस जयशंकर ने यह भी कहा, ‘नई भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक परिस्थितियों की वजह से आज वैश्वीकरण दबाव में है और भारत नियम-कायदे पर आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘21वीं सदी में एशियाई देश और सीआईसीए निश्चय ही एशिया के विकास के अलावा शांति और सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’

उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान में भारत शांति-सुलह प्रक्रिया का समर्थन करता है. साथ ही चाहता है कि इस काम में वहां की निर्वाचित सरकार समाज के हर वर्ग को इस प्रक्रिया में साथ लेकर चले. इसके साथ ही उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए ‘सागर’ (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास) का विजन भी दिया. साथ ही इसे सीआईसीए के लक्ष्यों के मुताबिक बताया.

भारत शुरुआत से ही सीआईसीए का सदस्य देश है. इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वयं इसके पहले सम्मेलन में शिरकत की थी. तब वह सम्मेलन साल 2002 में कजाकस्तान के अल्माटी में आयोजित हुआ था.