दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शामिल होने से इनकार किया है. इस संबध में उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को एक चिट्ठी भी लिखी है. इस चिट्ठी में ममता बनर्जी ने कहा है, ‘बैठक में एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर चर्चा होनी है. लेकिन मैं समझती हूं कि इस मुद्दे पर सरकार को पहले एक श्वेतपत्र लाना चाहिए और कानूनी मामलों के जानकारों को विचार-विमर्श के लिए समय देना चाहिए. इस मामले पर जल्दबाजी करना ठीक नहीं होगा. इसलिए मैंने इस बैठक में शामिल नहीं होने के साथ ही अपना कोई प्रतिनिधि भी नहीं भेजने का फैसला किया है.’

इससे पहले केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद बीते शनिवार को दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की पहली बैठक में भी ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई थीं. उस बैठक में शामिल न होने को लेकर उन्होंने पहले की अपने विचार स्पष्ट कर दिए थे. तब उन्होंने नीति आयोग की बैठकों को ‘बेमतलब’ बतया था. साथ ही नीति आयोग की तुलना में योजना आयोग को बेहतर बताते हुए ममता बनर्जी ने योजना आयोग को दोबारा बहाल करने की मांग भी की थी. उस बैठक के अलावा वे नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल नहीं हुई थीं.

उधर, लोकसभा के बीते चुनाव के नतीजों के आने के बाद से टीएमसी के नेताओं के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर भी ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि रुपये के लालच में कुछ विधायकों और पार्षदों के टीएमसी छोड़ने का उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और टीएमसी के जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं वे ऐसा कर सकते हैं. उनका कहना था कि एक नेता के बदले वे पार्टी में 500 नए नेताओं को ला सकती हैं.

इस दौरान इसी सोमवार को पश्चिम बंगाल के नौपारा के विधायक सुनील सिंह के साथ टीएमसी के 11 पार्षद भाजपा में शामिल हो गए थे. इससे पहले इसी महीने टीएमसी विधायक मुनीरुल इस्लाम के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता गदाधर हाजरा और निमई दास ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी.