23 मई, 2019 को लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के ठीक पहले तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने को लेकर पूरी तरह से निश्चिंत थे. वे अपना मंत्रिमंडल बना रहे थे. उनकी योजना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के एमके स्टालिन को गृह मंत्री बनाने की थी. साथ ही वे अपनी सरकार में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को मंत्री बनाने का प्रस्ताव दे चुके थे.

यह खुलासा वरिष्ठ पत्रकार पंकज वोरा ने ‘द संडे गार्डियन’ में अपनी एक रिपोर्ट में किया है. उन्होंने दावा किया है कि लोकसभा चुनावों के दौरान जो टीम राहुल गांधी के आसपास काम कर रही थी, उसने उन्हें भ्रमित किया और राहुल गांधी इनकी बातों में आ गए. कांग्रेस के दूसरे सूत्र भी इन दावों पर सहमति व्यक्त करते हैं.

दरअसल, राहुल गांधी को उनकी टीम ने बताया था कि कांग्रेस 184 सीटों पर जीत हासिल कर रही है. प्रवीण चक्रवर्ती कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम कर रहे थे. उन्होंने इन सीटों की बाकायदा एक सूची राहुल गांधी को दी थी. इसमें उन 20 सीटों का भी जिक्र था जिन पर पार्टी हार भी सकती थी. उन्हें बताया गया था किसी भी परिस्थिति में कांग्रेस को 164 सीटें मिल रही हैं.

इन आंकड़ों के आधार पर राहुल गांधी ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए दक्षिणी दिल्ली में रहने वाले एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ से दो पत्र तैयार कराए थे. राहुल गांधी के निर्देश पर जीत का जुलूस निकालने की भी योजना बना ली गई थी. दिल्ली कांग्रेस के कुछ नेताओं को यह निर्देश दिया गया था कि 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर 10,000 लोगों को जमा करने की दिशा में काम करें. लेकिन ये सारी योजनाएं धरी की धरी रह गईं और एक बार फिर से नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत हासिल की.

जिस प्रवीण चक्रवर्ती के आंकड़ों पर राहुल गांधी सबसे अधिक भरोसा कर रहे थे, वे अब गायब हैं. उनसे संपर्क साधने की वरिष्ठ नेताओं की सारी कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं. पंकज वोरा ने यह भी लिखा है कि उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान जो डाटा जमा किया था, उसकी हार्ड डिस्क भी उन्होंने पार्टी को नहीं सौंपी है. हां, उन्होंने 24 करोड़ रुपये का बिल जरूर दे दिया है. वोरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अब यह दावा कर रहे हैं कि संभव है चक्रवर्ती कांग्रेस कार्यालय में भाजपा की ओर से ‘प्लांट’ किए गए हों. राहुल गांधी के कार्यालय में काम कर रहे आठ लोगों में से चार लोगों ने इस्तीफा दे दिया है.

इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सिर्फ राहुल गांधी को ही नहीं बल्कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी को भी इस बात पर पूरा यकीन था कि भाजपा सत्ता से बेदखल हो रही है और कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो रही है. 21 मई को जब प्रवीण चक्रवर्ती ने राहुल गांधी को 184 संभावित विजयी उम्मीदवारों की सूची दी तो कांग्रेस अध्यक्ष ने पहली बार जीत कर आने वाले 100 सांसदों की एक सूची तैयार का निर्देश दिया ताकि उन्हें इनके बारे में जानकारी मिल सके. साथ ही उन्होंने अपनी टीम को यह निर्देश भी दिया कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं की सूची भी तैयार की जाए जो चुनाव हार रहे हैं लेकिन जिन्हें वे अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं. इस सूची में मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन बंसल, हरीश रावत और अजय माकन जैसे नेताओं का नाम शामिल था.

रिपोर्ट के मुताबिक यह सूची मिलने के अगले दिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मिलकर रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया. दोनों ने संभावित सहयोगी दलों और अपनी पार्टी के प्रमुख नेताओं से संपर्क साधना शुरू किया. दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी ने एमके स्टालिन को फोन किया और उन्हें गृह मंत्री बनाने की इच्छा जताई. कांग्रेस अध्यक्ष ने शरद पवार से भी बातचीत की और उनसे आग्रह किया कि वे उनकी सरकार में शामिल हों.

बताया तो यह भी जा रहा है कि राहुल गांधी ने अखिलेश यादव से फोन करके यह पूछा कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की कितनी सीटें आ रही हैं. उन्होंने राहुल गांधी को बताया कि महागठबंधन की 40 से अधिक सीटें आ रही हैं. राहुल गांधी ने उन्हें बताया कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में नौ सीटें जीत रही है. उन्होंने इनमें रायबरेली और अमेठी के अलावा कानपुर, उन्नाव और फतेहपुर सिकरी का नाम लिया. राहुल गांधी ने अखिलेश को अहम मंत्री पद देने की पेशकश की. बिहार से तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को जानकारी दी कि वहां कांग्रेस पांच-छह सीटें जीत सकती है जबकि उनकी पार्टी तकरीबन 20 सीटें जीतने वाली है. वहीं उमर अब्दुल्ला को लग रहा था कि उनकी पार्टी तीन सीटें जीत रही है.

22 मई की शाम को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने दिल्ली के चाणक्यपुरी में साथ में खाना खाया. इसके बाद प्रियंका भी अपने काम पर लग गईं. उन्होंने कांग्रेस मुख्यमंत्रियों से अपने-अपने राज्यों के संभावित मंत्रियों की सूची भेजने को कहा.

इससे पहले एक बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल और प्रियंका के सामने यह दावा किया था कि प्रदेश की 25 सीटों में से कांग्रेस 14 से 16 सीटें जीत रही है. उन्होंने यह भी कहा था कि जीतने वालों में उनके बेटे वैभव गहलोत नहीं भी हो सकते हैं. उधर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दावा किया था कि प्रदेश की 29 सीटों में से 11 से 15 सीटें पार्टी जीत रही है. सिर्फ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमीनी सच्चाइयों के आधार पर जीत का आंकड़ा दिया था. उन्होंने कहा था कि पार्टी सिर्फ तीन या चार सीटें ही जीत पाएगी. हालांकि, उन्हें इस बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में पार्टी आठ सीटें जीत रही है. जब गुजरात के बारे में वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत रही है. बताया जाता है कि यह सुनकर राहुल गांधी असहज हो गए.

राहुल गांधी खुद इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि वे अमेठी और वायनाड दोनों सीटें जीत रहे हैं. उन्होंने अमेठी सीट छोड़ने का निर्णय ले लिया था और प्रियंका गांधी को यह भी कह दिया था कि वे इस सीट से उपचुनाव में उतरेंगी. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी खुद प्रियंका गांधी को उतारना चाहते थे लेकिन प्रियंका और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा इस​के लिए तैयार नहीं हुए. इन दोनों को यह लगा कि हार के साथ राजनीतिक सफर की शुरुआत ठीक नहीं होगी. फिर भी जब राहुल गांधी ने प्रियंका को इसके लिए मनाने की कोशिश की तो प्रियंका गांधी ने राहुल को बनारस से चुनाव लड़ने की सलाह दे दी.

22 मई की ही रात एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और अपने निजी सचिव के राजू को राहुल गांधी ने दक्षिणी दिल्ली के एक कानूनी विशेषज्ञ के पास भेजा. उनसे सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए दो पत्र बनवाए गए. एक में कांग्रेस की ओर से दावा पेश करने की बात थी तो दूसरी में सहयोगी दलों के समर्थन की. दोनों पत्र कांग्रेस अध्यक्ष के दफ्तर में लाए गए. लेकिन अगली सुबह यानी 23 मई, 2019 को जब नतीजे आने शुरू हुए तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी की उम्मीदें एक-एक करके धराशाई होती चली गईं.

अब चर्चा हो रही है कि या तो राहुल गांधी इतने भोले हैं कि अपने आसपास के लोगों की बात पर आंखें मूंदकर भरोसा करते हैं या फिर उन्हें उनकी टीम ने धोखा दिया. अपनी टीम की बातों के आधार पर राहुल गांधी कांग्रेस की जीत को लेकर इतने आश्वस्त थे कि वे चुनाव अभियान के दौरान में पूरे आत्मविश्वास से नरेंद्र मोदी और भाजपा की विदाई के दावे कर रहे थे. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी अपनी टीम और पार्टी नेताओं द्वारा उन्हें गलत सूचनाएं देने की वजह से बेहद आहत हैं और पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने का मन बना चुके हैं. यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर अध्यक्ष बने रहने के लिए चाहे जितना भी दबाव बनाएं लेकिन वे फिलहाल पार्टी की कमान हर हाल में किसी और को सौंपना चाहते हैं.