भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में 26 बैंकों के समूह ने निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एयरवेज के मामले को दिवाला संहिता के तहत कार्यवाही के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में भेज दिया है. एनसीएलटी इस पर बुधवार से सुनवाई करेगा. इस सूचना के बाद बंबई शेयर बाजार में मंगलवार को जेट एयरवेज का शेयर 41 प्रतिशत टूटकर 40.45 रुपये पर आ गया.

बैंकों को ठप पड़ी एयरलाइन जेट एयरवेज से 8,500 करोड़ रुपये की वसूली करनी है. बैकों को अब तक के प्रयास में कर्ज में डूबी जेट एयरवेज के पुनरोद्धार के लिए किसी कंपनी से कोई पुख्ता प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है. एतिहाद और हिंदुजा समूह ने हालांकि एयरलाइन में रुचि दिखाई, लेकिन उसकी ओर से कोई पुख्ता प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ. इसी वजह से बैंकों की सोमवार को हुई बैठक में एयरलाइन के मामले को एनसीएलटी में भेजने का फैसला किया गया. बैंकों के अलावा एयरलाइन पर माल और सेवाएं देने वालों का 10,000 करोड़ रुपये और कर्मचारियों के वेतन का 3,000 करोड़ रुपये का बकाया है.

जेट एयरवेज को कर्ज देने वाले बैंक पिछले पांच महीने से एयरलाइन को चलती हालत में बेचने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन, इसमें सफलता नहीं मिली. जेट एयरवेज के साथ व्यवसायिक सौदों में उधार देने वाली दो फर्मों शैमन व्हील्स और गग्गर एंटरप्राइजेज ने एयरलाइन के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने के लिए 10 जून को एनसीएलटी में अपील की थी. एयरलाइन पर शैमन व्हील्स का 8.74 करोड़ रुपये और गग्गर का 53 करोड़ रुपये का बकाया है.

कभी जेट एयरवेज देश की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी एयरलाइन के तौर पर जानी जाती थी. 25 साल पहले इस एयरलाइन को टिकटिंग एजेंट से उद्यमी बने नरेश गोयल ने शुरू किया था. नकदी संकट और एयरलाइन को पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों को भुगतान नहीं कर पाने की वजह से गत 17 अप्रैल से जेट एयरवेज का परिचालन बंद है.