अमेरिकी नौसेना ने बीते हफ्ते मध्य पूर्व में दो तेल वाहक जहाजों पर हुए हमले में ईरान का हाथ होने की आशंका जाहिर की है. अमेरिकी नौसेना के एक विस्फोटक विशेषज्ञ ने बुधवार को कहा कि पिछले सप्ताह ईरान के पास होर्मुज जल क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले के लिए जिस लिम्पेट माइन (विस्फोटक) का इस्तेमाल किया गया, वह ईरान के विस्फोटकों से मिलता-जुलता है.

पीटीआई के मुताबिक कमांडर सीन किडो ने यह बात अमेरिकी नौसेना द्वारा संवाददाताओं को हमले से जुड़े मलबे और एक चुंबक के कुछ टुकड़े दिखाए जाने के दौरान कही है.

संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा में हुए इस संवाददाता सम्मलेन में अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि इन चीजों को ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड उस समय छोड़ गए जब वे टैंकरों पर हमले के बाद एक बिना फटे विस्फोटक को साथ ले जाने के लिए जापानी टैंकर पर वापस आए थे. अधिकारियों के मुताबिक जापानी टैंकर पर हमला करने वालों के फिंगर प्रिंट सहित बायोमीट्रिक जानकारी हासिल कर ली गई है.

उधर, तेल टैंकरों पर हमले के आरोपों से लगातार इनकार कर रहे ईरान ने अमेरिकी नौसेना के इस दावे को भी खारिज किया है. ईरान ने कहा है कि उसकी सेना (रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प) का इन हमलों से कोई लेना-देना नहीं है.

बीते गुरूवार को ईरान के पास होर्मुज जल क्षेत्र में जापान के कोकूका करेजियस और नॉर्वे के फ्रंट आल्टेयर जहाज पर हमला किया गया था.

इस बीच इराक के दक्षिणी बसरा प्रांत में एक तेल स्थल पर बुधवार सुबह रॉकेट से हमला हुआ जिसमें तीन स्थानीय कर्मचारी घायल हो गए हैं. इनमें से एक की हालत गंभीर है. खबरों के मुताबिक यह रॉकेट दुनिया जानी-मानी कंपनी एक्सॉन मोबिल और अन्य विदेशी तेल कंपनियों से संबंधित एक परिसर में गिरा.