बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) के प्रकोप और इसके चलते हो रही बच्चों की मौत पर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार आक्रोश जताया जा रहा है. इस बीच आज यहां इस मामले की टीवी कवरेज पर खूब सवाल उठे हैं. फेसबुक और ट्विटर पर इस हवाले से न्यूज चैनल ‘आज तक’ की मंगलवार को प्रसारित एक रिपोर्ट का जिक्र किया जा रहा है. इसमें चैनल की एंकर/पत्रकार अंजना ओम कश्यप मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल के आईसीयू से रिपोर्टिंग करती दिखी थीं. इस दौरान उन्होंने जिस तरह डॉक्टरों से बात की, उसे लेकर सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि वे जबर्दस्ती डॉक्टरों के काम में बाधा बन रही थीं. साथ ही लोगों ने उनकी आईसीयू में मौजूदगी को भी गलत बताया है.

इसके साथ ही अंजना से कहा जा रहा है कि उन्हें डॉक्टरों के बजाय सरकार और प्रशासन से सवाल पूछने चाहिए थे. वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने कहा है, ‘काश कि अंजना ओम कश्यप ने नीतीश कुमार और मंगल पांडे (बिहार के स्वास्थ्य मंत्री) से सवाल पूछे होते. लेकिन सत्ता से सवाल इनकी फितरत है, फितरत में है तो बस असहाय लोगों से जबर्दस्ती के सवाल-जवाब करना.’

ऐसे आरोपों पर इस टीवी पत्रकार ने जवाब भी दिया है. अंजना ने एक ट्वीट में लिखा है, ‘अस्पताल में अप्रबंधन और बेरुखी का सच सामने लाना ज़रूरी था, है, रहेगा. आईसीयू में आए बच्चों को अटेंड करना ज़रूरी था, है, रहेगा. प्रोपेगेंडा वाले आज 108 बच्चों की मौत भूल गए. डॉक्टर के लिए मगरमच्छी सहानुभूति दिखाने वालो, हेकलिंग (वे हरकतें जिनसे आप किसी के काम में बाधा बनते हैं) का प्रोपेगेंडा बंद करिए...’

सोशल मीडिया में चमकी बुखार से जुड़ी इस मीडिया रिपोर्ट पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं :

रोशन राय | @RoshanKrRai

अंजना ओम कश्यप आईसीयू में पहुंची और पत्रकारिता वेंटीलेटर पर.

मंजुल | @MANJULtoons

टीवी पत्रकारिता तो काफी समय से आईसीयू में ही है. इसे इलाज की सख्त जरूरत है.

पन्स्टर |‏ @Pun_Starr

अंजना ओम कश्यप की बुराई करना बंद कीजिए! वे सिर्फ अपना काम कर रही थीं. वे इंसेफेलाइटिस के मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों से व्यवस्थाओं की कमी के बारे में सवाल कर रही थीं ताकि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री शांति से क्रिकेट विश्वकप का मजा ले सकें.

सर्वप्रिया सांगवान | @DrSarvapriya

कोई जाकर मुजफ्फरपुर से अब यह रिपोर्ट कर दे कि मीडिया किस तरह बच्चों के लिए बची-खुची स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित कर रहा है.

उमाशंकर सिंह | @umashankarsingh

कम संसाधन और चिकित्सा व्यवस्था की बदहाली के बावजूद बच्चों की बचाने की कोशिश में जुटे जूनियर डाक्टरों को लताड़ने के बजाय यह वक़्त है जब कोई चैनल अपनी चौपाल लगाए और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गेस्ट बुलाकर लताड़े. उन पर चिल्लाए. वो न आएं तो वह भी बताए पर इसके लिए माद्दा चाहिए.