गुजरात के एक पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) संजीव भट्‌ट को उम्रकैद की सज़ा हुई है. जामनगर, गुजरात की अदालत ने पुलिस हिरासत में मौत के मामले में संजीव भट्‌ट और एक अन्य पुलिस अफसर प्रवीण सिंह झाला को यह सज़ा सुनाई है.

ख़बरों के मुताबिक जज डीएम व्यास की अदालत ने संजीव भट्‌ट और प्रवीण सिंह झाला को हत्या के अपराध का दोषी माना है. इसीलिए दोनों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. इस मामले में अभी पांच अन्य आरोपित भी हैं. उनकी सज़ा का ऐलान होना बाकी है. संजीव भट्‌ट 1988 बैच के आईपीएस हैं. वे फिलहाल पालनपुर की जेल में न्यायिक हिरासत काट रहे हैं. उन पर एक अन्य आरोप ये भी है कि उन्होंने 22 साल पहले किसी को फंसाने के मक़सद से उसके ठिकाने पर मादक पदार्थ रखवाए थे.

हालांकि गुरुवार को जिस मामले में उन्हें उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है वह 1990 का है. उस वक़्त संजीव भट्‌ट जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात थे. उसी समय भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा निकाली जा रही थी. उसके चलते कस्बे में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे. तब संजीव भट्‌ट ने इस आरोप में 150 लोगों को हिरासत में लिया था. उन्हीं में से एक प्रभुदास वैष्णानी की हिरासत से छूटने के तुरंत बाद अस्पताल में मौत हो गई थी. उनके भाई अमृतलाल ने तब आरोप लगाया था कि पुलिस की पिटाई की वज़ह से प्रभुदास की मौत हुई है.