ईरान ने अमेरिका का एक ड्रोन मार गिराया है जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंचने के आसार नजर आ रहे हैं. गुरूवार को ईरान की सेना ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उसने हर्मुज जल क्षेत्र के पास अपने हवाई इलाके में एक अमेरिकी जासूसी विमान (ड्रोन) को मार गिराया है.

पीटीआई के मुताबिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने एक बयान में कहा कि उसके सैनिकों ने अमेरिका निर्मित ‘ग्लोबल हॉक निगरानी ड्रोन’ विमान को एक मिसाइल से मार गिराया है. यह हमला उस वक्त किया गया, जब वह ईरान के होरमोजगन प्रांत के जल क्षेत्र के ऊपर उड़ रहा था.

ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम ने रिवोल्यूशनरी गार्ड प्रमुख हुसैन सलामी के हवाले से बताया है कि ड्रोन विमान को गिराना इसलिए जरूरी था क्योंकि वह ईरान की सीमाओं का उल्लंघन कर रहा था. समाचार एजेंसी के मुताबिक हुसैन सलामी ने यह भी कहा, ‘हम यह घोषणा करते हैं कि हम युद्ध नहीं चाहते हैं, लेकिन हम युद्ध की किसी भी घोषणा का जवाब देने के लिए हर समय तैयार हैं.’

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने भी ईरानी सेना द्वारा अपना ड्रोन मार गिराए जाने की पुष्टि की है. लेकिन, पेंटागन का यह भी कहना है कि अमेरिकी ड्रोन पर जब मिसाइल से हमला हुआ तब वह अंतराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था, ना कि ईरान के हवाई क्षेत्र में.

पीटीआई के मुताबिक अमेरिकी मध्य कमान के प्रवक्ता एवं नौसेना कैप्टन बिल अर्बन ने एक बयान में कहा, ‘बीएएमएस- ड्रोन को एक ईरानी मिसाइल ने उस वक्त मार गिराया जब यह होर्मुज जल क्षेत्र के ऊपर अंतरराष्ट्रीय हवाई इलाके में उड़ रहा था.’ कैप्टन बिल अर्बन के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन के ईरानी हवाई क्षेत्र में होने की रिपोर्ट पूरी तरह झूठी है.

बीत हफ्ते होर्मुज जल क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ था जिसके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया था. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था. हालांकि, ईरान ने टैंकरों पर हुए हमले में अपनी किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. ईरान का यह भी कहना है कि अमेरिका ने ही तेल वाहक जहाजों (टैंकरों) पर ये हमले करवाए हैं, ताकि इसके बहाने वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सके.

बीते साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और वैश्विक ताकतों के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया था. इसके बाद ट्रंप ने ईरान के तेल निर्यात पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी थी. इसके बाद से ही ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.