केंद्र की तरह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी भ्रष्ट अधिकारियों पर सख़्ती बरतने वाली है. या यूं भी कह सकते हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चलते दिख रहे हैं. योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राज्य सचिवालय में हुई समीक्षा बैठक के दौरान भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन रिटायर करने के निर्देश दिए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भ्रष्ट अफ़सरों की सूची तैयार की जाए. उनका प्रमोशन रोक दिया जाए. उन्हें जबरन सेवानिवृत्ति दी जाए. मुख्यमंत्री ने ई-ऑफिस प्रणाली में तेजी लाने की ज़रूरत पर जोर दिया और बताया कि सचिवालय में जल्द ही कर्मचारियों की आवाज़ाही दर्ज़ करने के लिए बायोमीट्रिक सिस्टम शुरू किया जा रहा है.

ग़ौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने भी दूसरे कार्यकाल की शुरूआत में ही लिए गए दो बड़े फ़ैसलों में वित्त मंत्रालय के 27 वरिष्ठ अफ़सराें को जबरन सेवानिवृत्ति दी है. इन अफ़सरों पर भ्रष्टाचार सहित तमाम आरोप हैं. जबरन रिटायर किए जा रहे अफ़सरों में 15 सीबीईसी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज़ एंड कस्टम्स) और बाकी सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज़) के हैं.