केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को लोकसभा में भारी हंगामे के बीच एक बार फिर तीन तलाक विधेयक पेश किया. खबरों के मुताबिक इसे पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि तीन तलाक विधेयक पिछली लोकसभा में पारित हो चुका है. लेकिन राज्यसभा में लंबित रहने और 16वीं लोकसभा का कार्यकाल खत्म हो जाने से इसे एक बार फिर लाया गया है. इसके साथ ही उन्होंने इस विधेयक को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाला भी बताया.

वहीं विपक्ष के 74 के मुकाबले 186 वोटों के समर्थन से पेश किए गए इस विधेयक पर ऑल इंडिया मजसिल-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एमआईएम) के साथ ही कांग्रेस ने विरोध जताया. एमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे केवल मुस्लिम पुरुषों को ही सजा मिलेगी. इसके साथ ही सवालिया लहजे में उन्होंने कहा, ‘सरकार भला हिंदू महिलाओं की चिंता क्यों नहीं करती. सबरीमला को लेकर आपका क्या रुख है. उस मुद्दे पर क्यों आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ हैं.’

ओवैसी ने आगे कहा, ‘इस विधेयक के कानून बनने पर जिन शौहरों को सजा मिलेगी क्या सरकार उन महिलाओं का खर्च देने के लिए तैयार है.’ इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि संसद का काम कानून बनाने का है और जनता ने हमें कानून बनाने के लिए चुना है. कानून पर बहस और व्याख्या का काम अदालत में होता है इसलिए लोकसभा को अदालत न बनाया जाए.

उधर, कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने भी तीन तलाक विधेयक पर विरोध जताया. उन्होंने कहा कि किसी एक समुदाय को लक्ष्य बनाने के बजाय ऐसा कानून लाया जाना चाहिए जिससे ऐसा करने वाले सभी उसके दायरे में आ सकें. शशि थरूर ने आगे कहा कि इस विधेयक से मुस्लिम महिलाओं की स्थित में कोई बदलाव आने वाला नहीं है. इससे लोगों को सिर्फ परेशानी ही होगी इसलिए उनकी पार्टी इसके समर्थन में नहीं है.

इस बीच लोकसभा में यह विधेयक पेश करने के बाद रविशंकर प्रसाद ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत की. कांग्रेस की तरफ से इस विधेयक का विरोध जताए जाने को लेकर उन्होंने निराशा जताई. साथ ही कहा कि पिछली बार जब यह विधेयक सदन में रखा गया था तो उस वक्त कांग्रेस वॉकआउट कर गई थी. लेकिन आज जब कांग्रेस के संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के रूप में एक महिला हैं तो उस स्थिति में यह पार्टी महिला विरोधी रवैया अपना रही है.