आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू से भाजपा में शामिल होने वाले अपने चार सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है.

पीटीआई ने राज्यसभा से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया है कि टीडीपी के तीन लोकसभा और दो राज्यसभा सदस्यों ने शुक्रवार को एम वेंकैया नायडू से मुलाकात कर पार्टी से अलग हुये सांसदों की उच्च सदन की सदस्यता रद्द करने की मांग की. उन्होंने उस अर्जी को भी खरिज करने की अपील की है जिसमें बागी सांसदों ने अपने दल के भाजपा में विलय की बात कही है. राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि सभापति ने भाजपा और टीडीपी के विधायी दलों से जुड़े इस मामले को संज्ञान में लिया है, जो दलबदल कानून की धारा चार के तहत पेश किया गया था.

खबरों के मुताबिक टीडीपी ने वेंकैया नायडू को अपने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने का मांग पत्र भी सौंपा है. इस पत्र में कहा गया है कि राज्यसभा में पार्टी विधायी दल का भाजपा में विलय करने के लिये बागी सांसदों को कभी अधिकृत नहीं किया गया है और यह घटना ऐसे समय हुयी है जब टीडीपी प्रमुख चंद्र बाबू नायडू यूरोप दौरे पर हैं.

हालांकि, कल हुए इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा सचिवालय ने उच्च सदन में भाजपा और टीडीपी के सांसदों की संख्या को आधिकारिक तौर पर अपडेट कर दिया है. अब राज्यसभा की वेबसाइट पर भी टीडीपी के सांसदों की संख्या छह से घटकर दो कर दी गयी है. वहीं भाजपा की सदस्य संख्या 71 से बढ़कर 75 हो गयी है.

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने भी कहा है कि टीडीपी सांसदों के भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गयी. उनके मुताबिक सभापति कार्यालय ने चारों (बागी) सांसदों के नाम भाजपा के राज्यसभा सांसदों की सूची में शामिल करने के बारे में जानकारी भी दे दी है. जावडेकर ने कहा कि अब टीडीपी के इन (बागी) सांसदों को भाजपा सांसदों के रूप में मान्यता मिल गयी है.

गुरूवार को टीडीपी के चार राज्यसभा सांसद वाई एस चौधरी, सी एम रमेश, जी मोहन राव और टीजी वेंकटेश भाजपा में शामिल हो गए थे. इन्होंने सभापति से उनके विधायी दल (टीडीपी) का भाजपा में विलय करने की मांग की थी.