परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता को लेकर चीन ने एक बार फिर अड़ंगा लगा दिया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने कहा, ‘चीन एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध नहीं कर रहा. इस मुद्दे पर हमारा रुख पहले जैसा ही है. नियमों के अनुसार इस संगठन में केवल वही देश सदस्यता पा सकते हैं, जिन्होंने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत किए हों. लेकिन भारत ने अब तक ऐसा नहीं किया है.’ 20-21 जून को कजाकस्तान की राजधानी अस्ताना में हुई एनएसजी की एक बैठक को लेकर उन्होंने ये बातें शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. भारत ने एनएसजी की सदस्यता पाने के लिए साल 2016 में आवेदन किया था.

नेपाल ने भारत से आयातित फलों और सब्जियों पर रोक लगाई

नेपाल ने भारत से आयातित फलों और सब्जियों पर भी रोक लगा दी है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक उसका कहना है कि भारत से आने वाले रसायनयुक्त फलों और सब्जियों के सेवन से उसके बच्चे बीमार पड़ रहे हैं. पड़ोसी देश की सरकार की मानें तो अब लैब टेस्ट के बाद ही भारत की फल-सब्जी को बेचने की अनुमति दी जाएगी. बताया जाता है कि इस फैसले के बाद भारत-नेपाल सीमा पर इन चीजों से लदे 100 ट्रक खड़े हो गए हैं. इससे पहले नेपाल ने भारत से आने वाली मछलियों पर भी रोक लगा दी थी. हालांकि, पश्चिम बंगाल में लैब टेस्ट होने के बाद यह आयात फिर बहाल हो गया था.

तमिलनाडु : केवल एक बच्चे के लिए 76 साल पुराना प्राथमिक विद्यालय खोला गया

तमिलनाडु के कोयंबटूर में आदि द्रविड़ और आदिवासी कल्याण विभाग ने केवल एक बच्चे के लिए 76 साल पुराना ब्रिटिशकालीन प्राथमिक विद्यालय फिर से खोला है. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक चाय बगान में मजदूरी करने वाली राजेश्वरी अपने छह साल के बेटे शिवा का स्कूल में दाखिला करवाना चाहती थीं. लेकिन, इलाके में एकमात्र सरकारी स्कूल बंद होने की वजह से वे निराश हो गई थीं. इसके बाद उन्होंने इस स्कूल को फिर से खोलने और दाखिले की मांग को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन दिया. इसके बाद केवल एक बच्चे के लिए स्कूल को फिर से खोला गया. बताया जाता है कि इस स्कूल का निर्माण साल 1943 में चाय बगान के मजदूरों के बच्चों के लिए किया गया था. लेकिन, साल 2017-18 में छात्र न होने की वजह से स्कूल को बंद कर दिया गया.

केंद्रीय वित्त मंत्री ने आर्थिक विकास के लिए केंद्र और राज्यों के बीच आपसी सहयोग पर जोर दिया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्र और राज्यों के बीच आपसी सहयोग पर जोर दिया है. द हिंदू के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘कोई भी लक्ष्य उस वक्त तक हासिल नहीं किया जा सकता जब तक केंद्र और राज्य आपस में मिलजुल कर काम न करें.’ निर्मला सीतारमण ने यह टिप्पणी राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान की. उन्होंने आगे कहा, ‘केंद्र की जिम्मेदारी है कि वह आर्थिक विकास के लिए दिशा निर्धारित करे. वहीं, राज्यों के पास इसे जमीन पर उतारने की जवाबदेही है.’ इसके साथ ही, निर्मला सीतारमण ने इस बात का भी जिक्र किया कि करों से हासिल राजस्व के बंटवारे में राज्यों की हिस्सेदारी 32 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी हो गई है.

अब रेल यात्रियों को सब्सिडी छोड़ने का विकल्प देने का प्रस्ताव

भारतीय रेलवे ने टिकट पर सब्सिडी छोड़ने का विकल्प ग्राहकों के सामने रखने का प्रस्ताव तैयार किया है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक रेल मंत्रालय ने सौ दिनों के एजेंडे में इस प्रस्ताव को शामिल कर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजा है. मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि लागत बढ़ने से चिंतित रेलवे ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए इसे तैयार किया है. इसके तहत टिकट बुक करते वक्त यात्रियों को सब्सिडी लेने या छोड़ने का विकल्प दिया जाएगा. हालांकि, अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि यात्रियों को यह विकल्प काउंटर टिकट पर भी मिलेगा या केवल ऑनलाइन. बताया जाता है कि एक टिकट पर भारतीय रेल कुल किराए का 47 फीसदी सब्सिडी के तौर पर देती है. यानी कोई यात्री यदि सब्सिडी छोड़ना चाहता है तो उसे दोगुना किराया देना होगा.

भारत के साल 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने पर संशय

साल 2022 में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से शूटिंग प्रतिस्पर्द्धा को हटाए जाने पर भारत ने नाराजगी जाहिर की है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने कहा है कि वह इसके विरोध में किसी भी तरह का कदम उठाने से संकोच नहीं करेगा. इसमें इस प्रतियोगिता से बाहर होना भी शामिल है. इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स महासंघ (सीजीएफ) ने गुरुवार को अपनी कार्यकारी बैठक में इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों से शूटिंग को बाहर करने का फैसला किया था. वहीं, आईओए के महासचिव राजीव मेहता का कहना है, ‘हम जानते हैं कि अब सीजीएफ के फैसले को बदलना मुश्किल है लेकिन, अभी कुछ नहीं बिगड़ा है.’ उन्होंने आगे कहा कि संघ सीजीएफ से इस फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध करेगा.