सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन पत्र लिखे हैं. इनमें उन्होंने प्रधानमंत्री से सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या और हाई कोर्ट जजों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का अनुरोध किया है. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को दो संवैधानिक संशोधन करने का सुझाव दिया है. वहीं, तीसरे पत्र में सीजेआई रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के रिटायर्ड जजों की कार्यकाल नियुक्ति से जुड़ी पुरानी परंपरा फिर से शुरू करने की अपील की है. सीजेआई ने प्रधानमंत्री को लिखा कि संविधान की धारा 128 और 224ए के तहत ऐसे जजों की नियुक्ति की जाए ताकि सालों से लंबित पड़े मामले निपटाए जा सकें.

सीजेआई गोगोई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस समय ज्यादा से ज्यादा से 31 जज हो सकते हैं. यह स्थिति पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से बनी हुई है. वहीं, शीर्ष अदालत में लंबित मामलों की संख्या 58,669 थी. यह संख्या नए मामलों के साथ हर रोज बढ़ रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि शीर्ष अदालत में 26 मामले में 25 सालों, 100 मामले 20 सालों, 593 मामले 15 सालों से और 4,977 मामले पिछले दस सालों से लंबित हैं.

उन्होंने कहा कि जजों की संख्या कम होने की वजह से सीजेआई संवैधानिक व्याख्या और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में फैसला सुनाने के लिए पांच सदस्यीय पीठ गठित नहीं कर पाते. इस बारे में सीजेआई ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा, ‘आपको याद होगा कि तीन दशक पहले 1988 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 18 से 26 की गई थी. फिर 2009 में इसे 31 कर दिया गया, ताकि मामलों को जल्दी निपटाया जा सके.’ अखबार के मुताबिक इस आधार पर सीजेआई ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से 37 से की जाए. बता दें कि 2007 में सुप्रीम कोर्ट में 41,078 लंबित मामले थे, जो अब 58,669 हो गए हैं.

सीजेआई ने पत्र के जरिये प्रधानमंत्री के सामने हाई कोर्ट के जजों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने लिखा कि 2007 में तत्कालीन सीजेआई ने सरकार से कहा था कि हाई कोर्ट के जजों की संख्या एक दशक में कम से कम एक बार बढ़ाई जा सकती है. सीजेआई ने कहा, ‘इसके बावजूद इस बारे में कभी कोई नए मानक नहीं बनाए गए... हालांकि बीते एक दशक से हाई कोर्टों के जजों और मुख्य न्यायाधीशों की संख्या 895 से बढ़ाकर 1,079 की गई है, लेकिन उसके हिसाब से सुप्रीम कोर्ट में ऐसा नहीं किया गया है.’

खबर के मुताबिक पत्र में सीजेआई ने कहा, ‘लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का एक प्रमुख कारण हाई कोर्ट जजों की कमी है. इस समय देश में ऐसे जजों के 399 पद (37 प्रतिशत) खाली हैं... ऐसे में मेरी राय है कि हाई कोर्ट के मौजूदा जजों की रिटायरमेंट उम्र तीन साल बढ़ा दी जाए. इससे खाली पदों को भरने और लंबित मामले कम करने में मदद मिलेगी... लिहाजा हाई कोर्ट के जजों के रिटायर्ड होने की उम्र 62 से 65 की जाए.’