भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके कार्यकाल के अभी छह महीने बाकी थे. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विरल आचार्य को किसी भी तरह यह उम्मीद नहीं लग रही थी कि उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया जाएगा, ऐसे में उन्होंने समय से पहले ही इस्तीफा देने का फैसला किया.

विरल आचार्य को जनवरी, 2017 में रिजर्व बैंक का डिप्टी गवर्नर बनाया गया था. आर्थिक उदारीकरण के बाद वे इस पद पर नियुक्त होने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे. अब यह पद छोड़ने के बाद उनके वापस अमेरिका की न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं.

बीते छह महीनों में यह दूसरा मौका है जब रिजर्व बैंक में किसी हाई प्रोफाइल व्यक्ति ने अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले इस्तीफा दिया है. विरल आचार्य से पहले दिसंबर, 2018 में केंद्रीय बैंक के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उस समय उनके कार्यकाल के नौ महीने बाकी थे. रिपोर्टों के मुताबिक उर्जित पटेल ने सरकार से लगातार चल रहे मतभेदों के चलते आरबीआई गवर्नर पद छोड़ने का फैसला किया था.

वहीं, विरल आचार्य के मौजूदा आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ मतभेद की खबरें हैं. अखबार के मुताबिक बीती चार अप्रैल को नई ब्याज दरों के एलान से पहले केंद्रीय बैंक की मौद्रिक समिति की बैठक में दोनों के बीच मतभेद उभर कर सामने आए थे. खबर की मानें तो शक्तिकांत दास आर्थिक विकास के लिए रेपो दर में कटौती करने के पक्ष में थे. वहीं, विरल आचार्य ने इसे लेकर बैंक को सावधान किया था. बैठक के अंत में समिति के छह सदस्यों ने 4-2 के बहुमत से रेपो दर में कटौती करने का फैसला किया था.