उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी-समाजवादी पार्टी का महागठबंधन ख़त्म हो गया है. इसका ऐलान ख़ुद बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को किया. इससे पहले उन्होंने सपा के मुखिया अखिलेश यादव के व्यवहार पर सवाल उठाए और उन्हें ‘मुस्लिम विरोधी’ करार दिया.

लगातार एक के बाद एक किए ट्वीट्स में मायावती ने लिखा, ‘आगे से कोई भी चुनाव, वह छोटा हो या बड़ा हमारी पार्टी अकेले लड़ेगी.’ उन्होंने लिखा, ‘सपा (अखिलेश यादव की) सरकार के कार्यकाल में 2012 से 2017 के बीच बसपा-विरोधी, दलित-विरोधी कई फ़ैसले किए गए थे. ऐसे काम किए गए जो पदोन्नति में आरक्षण के विचार के भी विरुद्ध थे. फिर भी हमने सपा के प्रति अपनी ऐसी तमाम चिंताओं को किनारे रखकर उसके साथ जनहित को सर्वोपरि रखते हुए गठबंधन किया. इसका सम्मान भी किया.’

मायावती ने आगे लिखा, ‘लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद सपा के व्यवहार ने बसपा को इस पर पुनर्विचार के लिए मज़बूर कर दिया कि क्या उसके साथ भविष्य में भाजपा को हराया जाना संभव होगा.’ यही नहीं, ख़बरों की मानें तो मायावती ने पार्टी की एक बैठक में अखिलेश यादव को ‘मुस्लिम विरोधी’ भी बताया है. उन्होंने बैठक के दौरान ख़ुलासा किया, ‘अखिलेश ने मुझसे मुस्लिमों को टिकट न देने के लिए कहा था. उनकी दलील थी कि इससे धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होगा. लेकिन मैंने उनकी बात नहीं सुनी.’

ग़ौरतलब है कि मायावती ने रविवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद अखिलेश यादव के व्यवहार पर भी सवाल उठाए थे. उन्हाेंने कहा था कि लोकसभा ‘चुनाव में हार के बाद अखिलेश ने हमें एक फोन तक नहीं किया.’ जबकि इससे क़रीब तीन सप्ताह पहले मायावती ने कहा था कि भविष्य में ‘अखिलेश यादव और उनकी सपा के साथ हमारे मधुर संबंध जारी रहेंगे.’