रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे की खबर आज सोशल मीडिया में काफी चर्चा में है. बीते साल विरल आचार्य भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के साथ मतभेद की वजह से चर्चा में आए थे. तब की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने सरकार को देश के इस केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता में दखल देने को लेकर चेताया था. वहीं ताजा खबरों के मुताबिक विरल आचार्य के वर्तमान गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ भी नीतिगत मुद्दों पर असहमति थी. यही वजह है कि आज कई लोगों ने रिजर्व बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

केंद्र में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली पिछली सरकार में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को इस्तीफा देना पड़ा था. उनके अलावा नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भी अपने कार्यकाल के बीच में ही इस्तीफा दिया था. यही वजह है कि विरल आचार्य के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़े तबके ने आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार अपने काम में माहिर आर्थिक विशेषज्ञों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती. इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार एमके वेणु का ट्वीट है, ‘विरल आचार्य के साथ ही ऐसे कई अर्थशास्त्री पहले इस्तीफा दे चुके हैं... और ध्यान देने वाली बात है कि ऐसे कई संस्थान जिनमें आर्थिक विशेषज्ञ सलाहकार हैं, उन्हें आईएएस अफसर चला रहे हैं!’

इसी खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

इंडियन |‏ @insidernews__

दबे-छिपे आर्थिक संकट को देखकर रिजर्व बैंक का हर गवर्नर और अर्थशास्त्री :

कूमर शाह | @KoomarShah

रघुराम राजन के आरबीआई गवर्नर का पद छोड़ने के बाद मोदी ने नोटबंदी की थी. फिर जब उर्जित पटेल ने गए तब मोदी सरकार ने बैंक से 28 हजार करोड़ रुपये ले लिए और अपने लिए वोट खरीदे. अब बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने इस्तीफा दे दिया है. पता नहीं आगे क्या आर्थिक दुर्घटना होने जा रही है!

रिटायर्ड वसूली भाई | @Vishj05

डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने रिजर्व बैंक छोड़ दी है. रघुराम राजन, उर्जित पटेल और एक हजार के नोट के बाद रिजर्व बैंक से यह भी एक हाई-प्रोफाइल विदाई है.

अभिषेक गुट | @AbhishekGut

विरल आचार्य के डिप्टी गवर्नर के पद से इस्तीफा देने के बाद आरबीआई का नाम बदलकर रिजर्व बैंक ऑफ बीजेपी रखा जा सकता है. कई सारे इस्तीफे बताते हैं कि देश के इस केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता खतरे में है.

रवि उपाध्याय | @raviupadhyay16

चूंकि केंद्र सरकार में हर आदमी अर्थशास्त्री है, इसलिए गवर्नर-डिप्टी गवर्नर इस्तीफा दे रहे हैं.

प्रीति शर्मा |@PreetiSMenon

यह अच्छा ही हुआ कि विरल आचार्य ने रिजर्व बैंक छोड़ दी. हमें अर्थशास्त्रियों की जरूरत नहीं है. हमारे केंद्रीय बैंक के लिए यही सही है कि उसे चलाने वाला इतिहास का जानकार हो (शक्तिकांत दास इतिहास में एमए हैं.)